महान पहलवान खाशाबा दादासाहेब जाधव (केडी जाधव) को मरणोपरांत 'पद्म विभूषण' देने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का अहम फैसला सामने आया है. हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वो इस मामले में 4 मई 2026 तक फैसला ले.
जस्टिस माधव जे. जामदार और जस्टिस प्रवीण एस. पाटिल की बेंच ने 'कुस्तीवीर खाशाबा जाधव फाउंडेशन' की दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की. ये एनजीओ केडी जाधव के बेटे रंजीत के. जाधव की है.
जाधव स्वतंत्र भारत के पहले एथलीट थे जिन्होंने व्यक्तिगत पदक जीता, क्योंकि इससे पहले भारत के पदक सिर्फ फील्ड हॉकी (टीम कंपीटीशन) में आए थे. अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, 'इस बात में को शक नहीं है कि खाशाबा दादासाहेब जाधव भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता हैं.'
याचिकाकर्ता की ओर से वकील संग्राम देसाई ने दलील दी कि खाशाबा जाधव को अब तक पद्म पुरस्कार नहीं दिया गया, क्योंकि नियमों के मुताबिक मरणोपरांत पुरस्कार मौत के एक साल के भीतर दिया जाता है. वकील ने तर्क दिया कि जाधव को 2001 में 'अर्जुन पुरस्कार' दिया गया था, जो उनके निधन के लगभग 17 साल बाद और 1952 के ओलंपिक पदक जीतने के 51 साल बाद मिला था.
5 मई को अगली सुनवाई
याचिका में मांग की गई है कि गृह मंत्रालय और पद्म पुरस्कार समिति जाधव को मरणोपरांत 'पद्म विभूषण' देने के लिए नए सिरे से विचार करे. अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी, जहां केंद्र सरकार को अपने फैसले की जानकारी देनी होगी.
पिछले साल दायर इस याचिका पर लंबी चर्चा के बाद, बेंच ने निर्देश दिया, 'भारत सरकार को 4 मई 2026 को या उससे पहले सही फैसला लेने का निर्देश दिया जाता है. राज्य सरकार को अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो उसका तुरंत इस्तेमाल करे.'खाशाबा दादासाहेब जाधव भारत को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक दिलाने वाले पहलवान के तौर पर जाना जाता है.
यह भी पढ़ें: केडी जाधव थे व्यक्तिगत मेडल हासिल करने वाले पहले भारतीय
केडी जाधव को 'पॉकेट डायनेमो' के नाम से जाना जाता था. उन्होंने 1952 के हेलसिंकी समर ओलंपिक में कुश्ती (बैंटमवेट कैटेगिरी) में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था. 15 जनवरी 1926 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के गोलेश्वर में जन्मे जाधव को हेलसिंकी जाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था. उन्होंने अपने गांव वालों और स्थानीय समुदाय से चंदा इकट्ठा करके अपनी यात्रा का खर्च जुटाया था.
विद्या