ठाणे जिले की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दबदबा कायम हुआ है. कल्याण-डोंबिवली (KDMC) और उल्हासनगर (UMC) महानगरपालिका के चुनाव परिणामों के बाद सत्ता के समीकरणों को जिस चतुराई से सुलझाया गया, उसने भाजपा के अपना ही महापौर बनाने के दावे को धराशायी कर दिया है. इन दोनों ही नगर निकायों में शिवसेना का महापौर बनना तय हो गया है, जबकि भाजपा को केवल उपमहापौर पद से ही संतोष करना पड़ा है. इस पूरी राजनीतिक बिसात के पीछे सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की रणनीतिक भूमिका को निर्णायक माना जा रहा है.
KDMC में भाजपा ने महायुति के तहत चुनाव लड़ते हुए 50 नगरसेवक चुने थे और वह महापौर पद को लेकर आश्वस्त नजर आ रही थी. हालांकि शिवसेना ने यहां मनसे के साथ रणनीतिक गठजोड़ कर सत्ता का खेल पलट दिया. शिवसेना के 53 नगरसेवक हैं, जबकि मनसे के 5 नगरसेवकों का समर्थन मिलने से शिवसेना का आंकड़ा 58 तक पहुंच गया. इसके अलावा ठाकरे गुट के 4 नगरसेवक फिलहाल नॉट-रिचेबल बताए जा रहे हैं, जिनके भी शिंदे गुट के साथ आने की चर्चा है. ऐसे में KDMC में शिवसेना का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है.
KDMC में शिवसेना की ओर से हर्षाली थवील चौधरी ने महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है, जबकि भाजपा की ओर से राहुल दामले ने उपमहापौर पद के लिए पर्चा भरा है. पूरी प्रक्रिया 3 फरवरी को पूरी होगी और दोनों पदों पर निर्विरोध चयन के संकेत मिल रहे हैं. उधर, उल्हासनगर महानगरपालिका में भी शिवसेना ने भाजपा की राह मुश्किल कर दी है. यहां भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़े थे. भाजपा ने 78 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 38 नगरसेवक जिताए, जबकि शिवसेना-टीम ओमी कलानी-साई पार्टी गठबंधन ने भी 38 सीटें हासिल कीं. इसके बाद वंचित बहुजन आघाड़ी के 2 नगरसेवक शिवसेना के समर्थन में आ गए, जिससे सत्ता गठन के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा पूरा हो गया.
उल्हासनगर में शिवसेना की ओर से अश्विनी कमलेश निकम ने महापौर पद के लिए और भाजपा की ओर से अमर लुंड ने उपमहापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है. यहां भी 3 फरवरी को प्रक्रिया पूरी होने के साथ निर्विरोध चयन की संभावना जताई जा रही है. चुनाव से पहले दोनों ही नगरपालिकाओं में भाजपा महापौर पद को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी, लेकिन शिवसेना ने KDMC में मनसे और उल्हासनगर में वंचित बहुजन आघाड़ी को साथ लेकर बाज़ी पलट दी. राजनीतिक गलियारों में इसे सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का रणनीतिक ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है, जिसने भाजपा को दोनों मनपाओं में करारा झटका दिया है.
मिथिलेश गुप्ता