फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर साढ़े सात करोड़ का इंश्योरेंस क्लेम, डॉक्टर, पुलिसकर्मी भी साजिश में शामिल

जलगांव में फर्जी सड़क हादसा दिखाकर करोड़ों रुपये का इंश्योरेंस क्लेम करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है. जांच में सामने आया कि एक व्यक्ति की मौत को दुर्घटना बताकर 50 लाख रुपये का क्लेम किया गया, जबकि उसकी असली मौत पहले ही बीमारी से हो चुकी थी. इस मामले में डॉक्टर, पुलिसकर्मी और मृतक के परिजन समेत कई लोगों की भूमिका सामने आई है.

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पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार (Photo: Screengrab) पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार (Photo: Screengrab)

मनीष शांताराम जोग

  • जलगांव,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:24 PM IST

महाराष्ट्र के जलगांव जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी सड़क हादसा दिखाकर करोड़ों रुपये का इंश्योरेंस क्लेम करने की साजिश का खुलासा हुआ है. पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले में डॉक्टर, पुलिसकर्मी और मृतक का परिवार भी शामिल था.

पुलिस के अनुसार यह मामला चालीसगांव तहसील के दहीवाड़ फाटा इलाके का है. यहां एक ड्राइवर की सड़क दुर्घटना में मौत दिखाकर करीब 50 लाख रुपये का इंश्योरेंस क्लेम करने की कोशिश की गई थी. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब श्रीराम जनलर इश्योरेंस के अधिकारियों ने जांच के दौरान कई गड़बड़ियां पाईं और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

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सड़क हादसा दिखाकर किया 50 लाख का क्लेम

शिकायत के मुताबिक अरुणा जाधव ने अपने पति राजेंद्र जाधव की दुर्घटना में मौत होने का दावा करते हुए इंश्योरेंस क्लेम दाखिल किया था. दावा किया गया था कि 19 अप्रैल 2025 की रात दहीवाड़ से मालेगांव जाते समय एक काली थार गाड़ी ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी, जिससे घायल होने के बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

हालांकि जब कंपनी ने मामले की गहराई से जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच में पता चला कि राजेंद्र जाधव की असल में 23 फरवरी 2024 को ही लिवर की गंभीर बीमारी से मौत हो चुकी थी. यहां तक कि उनके घर में लगी तस्वीर पर भी मृत्यु की तारीख 23 फरवरी 2024 ही लिखी मिली.

मृतक के नाम पर 10 बीमा कंपनियों से ली गई थीं पॉलिसियां

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आरटीआई के जरिए यह भी पता चला कि ग्राम पंचायत के मृत्यु रजिस्टर में उनकी मौत का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं था. इसके अलावा मृतक के दस्तावेजों में अलग-अलग पते पाए गए और उसके नाम पर करीब 10 अलग-अलग बीमा कंपनियों से पॉलिसी ली गई थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी एक्सीडेंट और मौत दिखाकर करीब 7.5 करोड़ रुपये के इंश्योरेंस क्लेम की साजिश रची गई थी.

इस मामले में पुलिस ने मृतक की पत्नी अरुणा जाधव, संभाजी जाधव, थार गाड़ी के चालक-मालिक, मेडिकल ऑफिसर मंदार करंबलेकर, चार पुलिसकर्मियों और इंश्योरेंस एजेंट समेत कई लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है.
 

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