मुंबई एयरपोर्ट के पास नमाज शेड पर विवाद... HC में सरकार ने कहा- कुछ ही दूर हैं 3 मस्जिद

मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने अदालत को बताया कि एयरपोर्ट परिसर के आसपास कम से कम तीन मस्जिदें मौजूद हैं, इसलिए मुस्लिम ड्राइवरों के लिए अलग प्रार्थना शेड की आवश्यकता नहीं है.

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बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी. (Photo- Representational) बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी. (Photo- Representational)

विद्या

  • मुंबई,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:16 PM IST

मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के वीआईपी गेट के पास ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए बने नमाज शेड को हटाए जाने के मामले में गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने अदालत को बताया कि एयरपोर्ट परिसर के आसपास कम से कम तीन मस्जिदें मौजूद हैं, इसलिए मुस्लिम ड्राइवरों के लिए अलग प्रार्थना शेड की आवश्यकता नहीं है.

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अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि नजदीकी मस्जिद 5 से 10 मिनट की दूरी पर है. उन्होंने कहा, 'ड्राइवर अपनी गाड़ी पार्क कर मस्जिद जा सकते हैं. हर जगह विशेष सुविधा की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती. संबंधित शेड को पहले ही हटाया जा चुका है.'

एयरपोर्ट ऑपरेटर की ओर से पेश अधिवक्ता विक्रम ननकानी ने दलील दी कि गेट-9 वीआईपी मूवमेंट का प्रवेश द्वार है और यह पुराना टर्मिनल क्षेत्र है. उनके अनुसार, एक मस्जिद गूगल मैप के अनुसार 13 मिनट की दूरी पर है, दूसरी 18 मिनट और तीसरी कुछ अधिक दूरी पर है. उन्होंने सवाल उठाया कि 13 मिनट पैदल चलने से किस प्रकार की हानि होती है.

MMRDA की ओर से यह भी कहा गया कि स्थानीय पुलिस ने वीआईपी गेट के पास बने इस शेड को सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण बताया था. हालांकि, याचिकाकर्ता ऑटो-टैक्सी-ओला-उबर ड्राइवर यूनियन की ओर से पेश अधिवक्ता शहजाद नकवी ने दावा किया कि शेड को सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि अनधिकृत निर्माण बताकर हटाया गया. उनका कहना था कि यह संरचना लगभग 30 वर्षों से मौजूद थी और पहले कभी पुलिस या एयरपोर्ट प्रशासन ने आपत्ति नहीं जताई.

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सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस एफ.पी. पूनावाला की पीठ ने कहा कि सुरक्षा चिंताएं समय के साथ बदलती रहती हैं. अदालत ने टिप्पणी की, 'सुरक्षा स्थिर नहीं रहती, परिस्थितियों के अनुसार विकसित होती है. मस्जिद एक विकल्प है, लेकिन यदि रमजान के दौरान अस्थायी व्यवस्था संभव हो और सुरक्षा से समझौता न हो, तो उसका प्रस्ताव मानचित्र सहित पेश किया जाए.'

अदालत ने MMRDA से 5 मार्च तक यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या रमजान के लिए अस्थायी ढांचा बनाया जा सकता है, जिसे बाद में हटाकर स्थल को मूल स्थिति में बहाल कर दिया जाए. मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी.

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