बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को वाशी से बीजेपी उम्मीदवार निलेश भोजने को बड़ी राहत दी है. अदालत ने उनका नामांकन खारिज करने के रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गलत बताया. राहत मिलने के बाद निलेश भोजने ने रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ प्रशासनिक जांच की मांग भी की है.
निलेश भोजने का नामांकन भ्रष्टाचार के आरोप के आधार पर खारिज किया गया था. यह आपत्ति शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के उम्मीदवार और जिला प्रमुख किशोर पाटकर ने दर्ज कराई थी. हालांकि राज्य में बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना महायुति में साथ हैं, लेकिन नवी मुंबई में दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.
सिर्फ मौजूदा पार्षदों पर लागू होता है कानून
हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड़ की पीठ ने भोजने के वकील नवरोज सीरवई की दलील को स्वीकार किया. अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम 1949 की धारा 10(1D), जिसके आधार पर नामांकन खारिज किया गया, केवल मौजूदा पार्षदों पर लागू होती है, न कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों पर.
भोजने ने अदालत को बताया कि जिस अवैध निर्माण का आरोप लगाया गया है, वह उनके पिता ने कराया था, न कि उन्होंने. उन्होंने कहा कि यह मकान उन्हें माता-पिता से गिफ्ट में मिला है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके इलाके में ऐसे करीब 4000 निर्माणों को नियमित करने की प्रक्रिया चल रही है.
नामांकन खारिज करने का फैसला गलत, उम्मीदवारी वैध
किशोर पाटकर की ओर से पेश वकील अनिल साखरे ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसमें दखल नहीं दिया जाना चाहिए. हालांकि अदालत ने पहले ही गुरुवार को भोजने के वार्ड का चुनाव रोक दिया था. शुक्रवार को रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से पेश वकील तेजस दांडे ने अदालत को बताया कि अगर याचिका मंजूर होती है तो बैलेट पेपर दोबारा छापकर चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है.
इसके बाद हाई कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर के नामांकन खारिज करने के फैसले को साफ तौर पर गलत बताते हुए रद्द कर दिया और नवी मुंबई महानगरपालिका के वार्ड 17-ए से निलेश भोजने की उम्मीदवारी को वैध करार दिया.
विद्या