रोज 600 टन कचरे से बनेगी 8 मेगावॉट बिजली, मुंबई का पहला वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगभग तैयार

मुंबई के देवनार डंपिंग ग्राउंड में बन रहा शहर का पहला बड़ा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. बीएमसी की इस परियोजना के तहत हर दिन 600 टन कचरे को प्रोसेस कर 7 से 8 मेगावॉट बिजली पैदा की जाएगी.

Advertisement
देवनार वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट हर दिन 600 टन कचरे से 8 मेगावाट बिजली बनाएगा. (Photo: ITG) देवनार वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट हर दिन 600 टन कचरे से 8 मेगावाट बिजली बनाएगा. (Photo: ITG)

मुस्तफा शेख

  • मुंबई,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:33 PM IST

मुंबई के देवनार डंपिंग ग्राउंड में बन रहा वेस्ट-टू-एनर्जी (WTE) प्लांट अब पूरा होने के करीब पहुंच गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्लांट इस साल के अंत तक चालू हो जाएगा. इसे मुंबई के वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन (BMC) के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत हर दिन 600 टन कचरे को प्रोसेस किया जाएगा और उससे करीब 7 से 8 मेगावॉट बिजली पैदा की जाएगी.

Advertisement

इस बिजली का इस्तेमाल मुख्य रूप से बीएमसी ही करेगी. करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह प्लांट 82 प्रतिशत तैयार हो चुका है. अधिकारियों के मुताबिक प्लांट का निर्माण शुरू करने से पहले यहां जमा करीब 10 लाख टन कचरे को साइंटिफिक तरीके से डिस्पोज करके जगह खाली किया गया था. यह प्लांट पारंपरिक लैंडफिल की तरह पुराने कचरे को नहीं, बल्कि रोजाना आने वाले सॉलिड वेस्ट को प्रोसेस करेगा. हालांकि यह मुंबई के कुल डेली वेस्ट का एक छोटा हिस्सा ही संभालेगा, लेकिन इसे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) का पहला बड़े पैमाने का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट माना जा रहा है.

प्रोजेक्ट को पहले ही पूरा होना था, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण जरूरी मशीनरी और कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से काम में देरी हुई. प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी रैमकी सस्टेनेबल सॉल्यूशंस (Ramky Sustainable Solutions) के प्रोजेक्ट हेड अभिजीत दत्ता ने बताया कि पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्लांट में कई स्तर के एमिशन कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं. उन्होंने बताया कि कचरे का सेग्रीगेशन प्लांट में ही किया जाएगा. प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाली एसिडिक गैस को लाइम स्लरी की मदद से निष्क्रिय किया जाएगा.

Advertisement

बॉयलर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का यूज
 

इसके बाद गैस को बैग फिल्टर से गुजारा जाएगा, जो धूल और अन्य कणों को रोकेंगे. इसके बाद ही उसे चिमनियों के जरिए वातावरण में छोड़ा जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक प्लांट को पूरी तरह (Fully Enclosed Structure) बंद संरचना के रूप में डिजाइन किया गया है, ताकि दुर्गंध और प्रदूषण को कम किया जा सके. यहां खुले में कचरा नहीं रखा जाएगा. इस प्रोजेक्ट की एक और खास बात यह है कि इसमें ताजे पानी का इस्तेमाल नहीं होगा. प्लांट के लिए पानी घाटकोपर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से करीब 4 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन के जरिए लाया जाएगा.

यह ट्रीटेड सीवेज वाटर होगा, जिसका उपयोग बॉयलर और वेस्ट प्रोसेसिंग में किया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि प्लांट को हर दिन करीब 480 किलोलीटर पानी की जरूरत होगी, जिसमें से लगभग 300 किलोलीटर सिर्फ स्टीम प्रोडक्शन में इस्तेमाल होगा. देवनार में पहले से चल रही बायो-रिमेडिएशन और बायो-सीएनजी परियोजनाओं के साथ यह नया वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लैंडफिल साइट्स (जहां शहर का कचरा डंप किया जाता है) पर दबाव कम करने और मुंबई के लॉन्ग टर्म वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा.

प्लांट से बनने वाली बिजली BMC के आएगी काम

हालांकि स्थानीय लोगों में इस प्रोजेक्ट को लेकर चिंता भी है. लोगों का कहना है कि देवनार इलाके में पहले से बायोमेडिकल वेस्ट फैसिलिटी मौजूद है और अब नए प्लांट से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बढ़ने की आशंका है. इस पर अधिकारियों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाली गैसों को कई लेवल पर ट्रीट किया जाएगा और बिना ट्रीटमेंट के कोई धुआं वातावरण में नहीं छोड़ा जाएगा. बीएमसी के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर किरण दिघवकर ने बताया कि फिलहाल यह विचार किया जा रहा है कि प्लांट से बनने वाली बिजली को बेचा जाए या बीएमसी की अपनी सुविधाओं में इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन (MERC) को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement