निकाय चुनावों के नतीजों के बाद महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज है. BMC में शिवसेना के नए चुने गए कॉर्पोरेटर्स इस वक्त मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में रुके हुए हैं. सभी 29 कॉर्पोरेटर को होटल में बुलाया गया था. इसके बाद कयासबाजी शुरू हो चुकी है.
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे बीजेपी से डरे हुए हैं. महायुति के हाथों बीएमसी में हारने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उद्धव ने संकेत दिया कि भारत के सबसे धनी नगर निकाय पर नियंत्रण पाने की होड़ में शिंदे-सेना गुट में फूट पड़ सकती है.
उद्धव ने 2022 की उस घटना का जिक्र करते हुए कहा, 'एकनाथ शिंदे बीजेपी से डरे हुए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने पार्षदों को पांच सितारा होटल में ठहराया है. उन्हें पता है कि अगर वे एक बार टूट चुके हैं, तो दोबारा भी फूट पड़ सकती है.' उस घटना में 40 विधायकों के विद्रोह के बाद शिवसेना में फूट पड़ गई थी. शिंदे के नेतृत्व में हुए इस विद्रोह के कारण उद्धव-कांग्रेस-एनसीपी सरकार गिर गई थी. इसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन कर मुख्यमंत्री का पद संभाला था.
सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि शिवसेना के सभी 29 पार्षदों को ताज लैंड्स एंड होटल पहुंचने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त या पार्षदों को अपने यहां लाने के प्रयासों को रोका जा सके.
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना की तरफ से बीएमसी में ढाई साल के लिए शिवसेना का मेयर बनाने की मांग की गई है. यानी शिवसेना के कॉर्पोरेटर चाहते हैं कि बीजेपी और शिवसेना का ढाई ढाई साल तक मेयर रहे, जिसमें पहले टर्म में शिवसेना का मेयर बनाया जाए. इस मांग की एक बड़ी वजह ये भी है कि बगैर शिवसेना के सपोर्ट के बीजेपी का मेयर नहीं बन सकता है.
29 में से 25 निकायों में महायुति की जीत
शुक्रवार को महाराष्ट्र में बीजेपी-शिव सेना गठबंधन ने नगर निगम चुनावों में शानदार जीत हासिल की और 29 में से 25 निकायों में जीत दर्ज की. बीएमसी चुनावों में बीजेपी की जीत सोने पर सुहागा साबित हुई, जहां बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि, बीजेपी को बहुमत के आंकड़े (114) को पार करने के लिए शिंदे सेना की जरूरत है. महायुति की इस जीत ने बीएमसी पर ठाकरे परिवार के लगभग तीन दशक के वर्चस्व को खत्म कर दिया है.
हालांकि, 20 साल की दूरी के बाद फिर से एक साथ आए उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी पूरी तरह से विफल नहीं हुई. उद्धव सेना-एमएनएस गठबंधन ने 71 सीटें (65-6) जीतकर मुंबई के मराठी बहुल इलाके के कई वार्डों पर अपना दबदबा बरकरार रखा.
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ने इस बात पर जोर दिया कि बहुमत की कमी के बावजूद उनकी पार्टी मुंबई में अपने मेयर का चुनाव जीतना चाहती है. उद्धव ने कहा, 'हमारी यही इच्छा है कि मुंबई में हमारे मेयर चुने जाएं. आज भी हमारी यही इच्छा है, लेकिन फिलहाल हमारे पास बहुमत नहीं है.'
उद्धव ने आगे कहा, 'मेरी और राज की संयुक्त रैलियों में भारी भीड़ देखी गई, लेकिन महायुति की रैलियों में केवल खाली कुर्सियाँ ही थीं. मुझे आश्चर्य है कि क्या कुर्सियों ने उनके लिए वोट दिया है, क्योंकि उन्हें वोट तो मिले, लेकिन हमारी भीड़ हमारे लिए वोटों में तब्दील नहीं हुई.'
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