बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार को ले जा रहे विमान के क्रैश होने के बाद सवालों का सिलसिला शुरू हो गया है. मुख्य प्रश्न यह है कि इस भयानक हादसे की वजह क्या हो सकती है? इस हादसे ने 2025 में गुजरात में हुए एअर इंडिया त्रासदी की यादें ताजा कर दी है, इसी के साथ ही भारत में एविएशन सेफ्टी पर फिर से सवाल उठने लगे हैं.
हालांकि DGCA की जांच से पूरी सच्चाई सामने आएगी, लेकिन एक सीनियर पायलट ने उस संभावित कारण के बारे में बताया है जिससे यह जानलेवा हादसा हुआ हो सकता है. इस हादसे में अजित पवार उनके दो अटेंडेंट और दो पायलट की मौत हो गई.
बारामती के टेबलटॉप रनवे से परिचित एक पायलट ने क्रैश के पीछे एक संभावित कारण के तौर पर "शॉर्ट फाइनल्स फेज़" कहे जाने वाले संभावित रूप से अस्थिर फाइनल अप्रोच की ओर इशारा किया. टेबलटॉप रनवे वह होता है जिसके एक या दोनों सिरे नीचे खाई की ओर होते हैं, जिससे लैंडिंग और भी मुश्किल हो जाती है.
बुधवार को बॉम्बार्डियर लीयरजेट 45 (VT-SSK) ने सुबह 8.10 बजे मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी, लेकिन उसने पहली कोशिश में ही लैंडिंग कैंसिल कर दी. यहां कोहरे की वजह से पहले से ही विजिबिलिटी कम थी. खास बात यह है कि पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमित कपूर के पास 16,000 घंटे से ज़्यादा उड़ान का अनुभव था.
क्या होता है शॉर्ट फाइनल फेज
शॉर्ट फाइनल फेज लैंडिंग के बहुत आखिरी हिस्से को कहते हैं, जब प्लेन रनवे की centerline पर पूरी तरह सीधा हो चुका होता है और टचडाउन (धरती पर उतरना) बहुत नजदीक होता है. यह फाइनल का सबसे अंतिम हिस्सा है.
क्या विमान अस्थिर था
सीनियर पायलट ने कहा कि लैंडिंग के दौरान विमान को पूरी तरह से स्टेबल होना चाहिए. यह एक क्रिटिकल फेज़ होता है जहां विमान की स्पीड कम हो रही होती है और वह नीचे उतर रहा होता है.
इस सीनियर पायलट ने कहा, "इस स्टेज पर एयरक्राफ्ट पूरे फ्लैप्स, स्लैट्स और लैंडिंग गियर बाहर निकालकर उड़ता है. इससे एयरक्राफ्ट हवा में अचानक बदलाव या टेक्निकल खराबी के प्रति बहुत ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है."
इसका मतलब यह है कि इस दौरान विंग के पीछे और आगे के हिस्से निकाल दिए जाते हैं, इससे प्लेन को कम स्पीड में भी ज्यादा लिफ्ट (उठने की ताकत) मिलती है, ताकि प्लेन धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से उतर सके. इस दौरान प्लेन का लैंडिंग गियर भी निकल दिया जाता है.
अब प्लेन बहुत धीमी स्पीड पर उड़ रहा होता है, और फ्लैप्स, स्लैट्स और गियर निकली हुई होने सेप्लेन का नियंत्रण थोड़ा मुश्किल हो जाता है.
हवा में अचानक बदलाव, जैसे तेज हवा का झोंका आए तो प्लेन आसानी से हिल सकता है, ऊपर-नीचे हो सकता है, या स्पीड बहुत तेजी से कम हो सकती है.
अगर कोई तकनीकी खराबी हो जाए, जैसे इंजन में दिक्कत,फ्लैप्स अचानक वापस चले जाएं, या कोई और सिस्टम फेल हो, तो प्लेन को संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि पहले से ही प्लेन कम स्पीड और ज्यादा ड्रैग वाली स्थिति में होता है.
शुरुआती जानकारी के मुताबिक अजित पवार का विमान रनवे की शुरुआत में बाउंड्री वॉल के पास क्रैश हो गया. जिसे पायलट ने "असामान्य" बताया है.
बारामती एयरफील्ड लगभग 2,000 फीट की ऊंचाई पर है और यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) नहीं है. इसलिए पायलटों को लैंडिंग के लिए मैनुअल और विज़ुअल तरीकों पर निर्भर रहना पड़ता है.
'अप्रोच स्पीड ज़्यादा थी'
सीनियर पायलट ने कहा कि अजित पवार के विमान की अप्रोच स्पीड नॉर्मल से काफी ज़्यादा थी. इससे विमान अनस्टेबल हो गया.
अप्रोच स्पीड़ क्या होता है?
अप्रोच स्पीड एविएशन इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण टर्म है, जो विमान के लैंडिंग के दौरान रनवे की ओर अंतिम अप्रोच करते समय रखी जाने वाली आदर्श गति को कहते हैं. सरल शब्दों में यह वह स्पीड है जिस पर पायलट विमान को रनवे पर लैंड करने के लिए अंतिम सीधी लाइन में उड़ाता है, ताकि लैंडिंग सुरक्षित, नियंत्रित और रनवे की लंबाई के अंदर हो सके.
पायलट ने बताया कि जब विमान जमीन से करीब 500 फीट ऊपर था, रनवे से लगभग 1.5 नॉटिकल मील दूर तब उसकी अप्रोच स्पीड 183 नॉट्स थी. लेकिन आमतौर पर Learjet जैसे चार्टर्ड विमान की स्पीड 106 से 135 नॉट्स के बीच होनी चाहिए.
नहीं करनी चाहिए थी लैंडिंग
पायलट ने कहा कि विमान को पहली बार की तरह ही गो-अराउंड करना चाहिए था. ना कि लैंडिंग जारी रखना चाहिए था. बता दें कि विमान ने पहली कोशिश में लैंडिंग कैंसिल कर दी थी.
सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के मुताबिक ATC ने सुबह 8.43 बजे एयरक्राफ्ट को रनवे 11 पर लैंड करने की इजाज़त दी थी. हालांकि पायलटों ने लैंडिंग क्लीयरेंस का रीडबैक नहीं दिया. अगले ही मिनट एयरक्राफ्ट में आग लग गई.
हालांकि अभी क्रैश के पीछे की कोई पक्की वजह नहीं बताई जा सकती है. पायलट ने अटकलों से सावधान करते हुए कहा, "सिर्फ़ पूरी जांच, जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर का एनालिसिस भी शामिल है, उसी से दुर्घटना की असली वजह पता चलेगी."
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