'पांच साल में पूरे इलाके को हरे कलर से रंग देंगे...', AIMIM नेता ने NCP के जितेंद्र आव्हाड को दी खुली चुनौती

मुंब्रा इलाके में AIMIM ने निकाय चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है. पार्टी की सबसे युवा पार्षद सहर शेख ने जीत के बाद एक बार फिर जितेंद्र आव्हाड को चुनौती दी है. सहर शेख ने कहा कि उनकी पहचान पार्टी से है और AIMIM का रंग हरा है.

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मुंब्रा में AIMIM की जीत के बाद युवा पार्षद सहर शेख का आक्रामक तेवर (Photo: ITG/ Abhijit Karande) मुंब्रा में AIMIM की जीत के बाद युवा पार्षद सहर शेख का आक्रामक तेवर (Photo: ITG/ Abhijit Karande)

अभिजीत करंडे

  • ठाणे,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:54 AM IST

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके में राजनीतिक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. प्रभाग क्रमांक 30 में आम इंसान पार्टी (AIMIM) ने जोरदार जीत हासिल की. इस प्रभाग में पार्टी के पांच पार्षदों ने चुनाव में सफलता पाकर जितेंद्र आव्हाड के गुट की पूरी ताकत कम कर दी है. खास बात यह है कि इसी सीट से AIMIM की टिकट पर चुनाव लड़ने वाली सहर शेख ने 12,900 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जिससे वे पार्टी की सबसे युवा पार्षद बन गई हैं.

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जित के बाद सहर शेख ने सीधे तौर पर जितेंद्र आव्हाड को चुनौती दी और कहा कि उनकी राजनीति किसी रंग या बाहरी पहचान से नहीं, बल्कि पार्टी की विचारधारा से जुड़ी है. हरे रंग को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने साफ किया कि AIMIM का आधिकारिक रंग हरा है और अगर उनका रंग कुछ और होता, तो वे उसी पहचान के साथ खड़ी रहतीं.

चुनावी प्रक्रिया के दौरान टिकट को लेकर हुए विवाद पर सहर शेख ने खुलकर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि फॉर्म जमा करने के आखिरी दिन तक उन्हें शरद पवार गुट की पार्टी की तरफ से टिकट मिलने का भरोसा था, लेकिन स्थानीय दबाव के कारण उनका टिकट काट दिया गया. इसके बाद उन्होंने AIMIM का दामन थामा और भारी मतों से जीत हासिल की.

सहर शेख ने अपने भाषण में क्या-क्या कहा?

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सहर शेख ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अब मेरी गुजारिश है आप सबसे की आने वाले पांच साल बाद भी जब इलेक्शंस होंगे. आप लोगों को उस इलेक्शन में इससे भी बड़ा मुंह तोड़ जवाब उनको देना है पूरे के पूरे मुंब्रा को ग्रीन कलर से ऐसे रंगना है की इन लोगों को यहां से बुरी तरह से पछाड़ के भेजना है. 

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र विधानसभा परिसर में भिड़े विधायक जितेंद्र आव्हाड और गोपीचंद पडलकर के समर्थक, गाड़ी टच होने पर हुआ था विवाद

सहर शेख का सफर

सहर शेख का राजनीतिक सफर भी काफी प्रेरणादायक है. उन्होंने IAS की कठिन परीक्षा पहली बार में पास कर ली थी लेकिन राजनीति में आने का फैसला लिया. उनके पिता यूनुस शेख ने उन्हें समाज के कमजोर वर्गों के लिए लड़ने और बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रेरणा दी. उनका प्रमुख लक्ष्य RTE के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाना है.

ठाणे नगर निगम में सहर शेख ने सबसे पहले रिजर्वेशन प्लॉट को रिहा कराने का मुद्दा उठाने का वादा किया है. वहीं, उनके पिता ने जितेंद्र आव्हाड पर सियासी चालाकी का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘झूठ की राजनीति’ कहकर जमकर निशाने पर लिया.

मुंब्रा की इस बड़ी जीत को स्थानीय राजनीति में नए युवा नेतृत्व की मजबूत पकड़ माना जा रहा है, जो जमीनी मुद्दों पर जनता के साथ खड़ा दिख रहा है.

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