गुलशन कुमार की हत्या में दोषियों की याचिका पर सुनवाई करेगा SC, 25 साल पहले हुई थी हत्या

12 अगस्त 1997 में टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की मुंबई में जीत नगर में एक मंदिर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 2002 में मुंबई की सेशन कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अब्दुल रऊफ को दोषी पाया था, जबकि अब्दुल राशिद को बरी कर दिया था. हालांकि, हाईकोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था.

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गुलशन कुमार की 1997 में मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. गुलशन कुमार की 1997 में मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

विद्या

  • मुंबई,
  • 17 मई 2022,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST
  • 12 अगस्त 1997 को टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी
  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में अब्दुल रऊफ और अब्दुल राशिद को दोषी पाया था

सुप्रीम कोर्ट टी सीरीज (T-Series) के मालिक गुलशन कुमार की हत्या के मामले में दोषी अब्दुल राशिद दाउद मर्चेंट और अब्दुल रऊफ दाउद मर्चेंट की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. कोर्ट इस मामले में जुलाई में सुनवाई करेगा. याचिका में अब्दुल राशिद ने जमानत भी मांगी है, जो सरकारी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर पद पर तैनात थे. 

दरअसल, 12 अगस्त 1997 को टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की मुंबई में जीत नगर में एक मंदिर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 2002 में मुंबई की सेशन कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अब्दुल रऊफ को दोषी पाया था, जबकि अब्दुल राशिद को बरी कर दिया था. 

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हालांकि, 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अब्दुल रऊफ की सजा को बरकरार रखा था, साथ ही अब्दुल राशिद को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को भी पलट दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अब्दुल राशिद शूट आउट में हिस्सा लेने वाले हत्यारों में से एक था. 

एडवोकेट सतीश माने शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है. उन्होंने अपील में कहा है कि हाईकोर्ट अपने सामने रखे गए सबूतों को समझने में विफल रहा है. साथ ही चश्मदीद गवाहों के बयानों के बीच विरोधाभासों को ध्यान में रखने में विफल रहा है. 

इसके साथ ही अब्दुल राशिद द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि शूट आउट के समय पहले गोली चलने के बाद चश्मदीद नारियल के पेड़ के पीछे छिप गया था. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कथित गवाह सिर्फ अब्दुल राशिद और सह-अभियुक्त को घटना स्थल पर पहुंचते देख पाया था. इतना ही नहीं अपील में कहा गया है कि एक और गवाह जो कुमार के पास खड़ा था, वह अब्दुल राशिद की पहचान करने में विफल रहा है. हाईकोर्ट ने इसे नजर अंदाज कर दिया. 
 
साथ ही याचिका में कहा गया है कि अब्दुल राशिद अब 50 साल का है. ऐसे में उसे स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं. इसलिए अब्दुल राशिद को जमानत दी जानी चाहिए. अभी अब्दिल राशिद नाशिक सेंट्रल जेल में बंद है. 

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पैरोल से भागा था अब्दुल रऊफ 

अब्दुल रऊफ को गुलशन कुमार हत्या के केस में दोषी ठहराया था. अप्रैल 2002 में उसे उम्रकैद की सजा मिली थी. फिर 2009 में वह पैरोल लेकर बाहर आया और बांग्लादेश भाग गया. फिर बाद में उसे बांग्लादेश से भारत लाया गया था.


 

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