झारखंड की राजनीति में आज का दिन काफी खास है. यहां की पॉलिटिक्स में दो बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. पहला, पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज आदिवासी नेता चंपाई सोरेन अपने बेटे बाबूलाल के साथ बीजेपी में शामिल होंगे. रांची के शहीद मैदान में दोपहर तीन बजे सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम होने जा रहा है. दूसरा, हेमंत सोरेन सरकार में चंपाई सोरेन की जगह घाटशिला के JMM विधायक रामदास सोरेन कैबिनेट मंत्री बनेंगे. ये कार्यक्रम सुबह 10.30 बजे राजभवन में होगा. ये दोनों राजनीतिक घटनाक्रम झारखंड की राजनीति के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं. क्योंकि यहां इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के सामने बीजेपी कड़ी टक्कर पेश कर रही है. खुद सीएम हेमंत सोरेन विवादों में घिरे हैं. ऐसे में उनके सामने अपने कोर वोटर्स आदिवासी वर्ग को संभाले रखने और विपक्ष से निपटने की कड़ी चुनौती है. आइए जानते हैं कि झारखंड में 6 महीने में कैसे राजनीतिक हालात बदल गए?
दरअसल, झारखंड की राजनीति में पिछले 6 महीने के दरम्यान काफी कुछ बहुत तेजी से बदलते देखा जा रहा है. यूं कह सकते हैं कि झारखंड में 31 जनवरी के बाद राजनीति में उथल-पुथल मची है. पहले हेमंत सोरेन का इस्तीफा और गिरफ्तारी, फिर चंपाई सोरेन की ताजपोशी और 5 महीने बाद ही हेमंत की रिहाई ने पार्टी के अंदर बगावत और ब्रेकअप की दीवार खड़ी कर दी है. चंपाई सोरेन ने एक दिन पहले ही पार्टी, पद और विधायकी छोड़ दी है. वे हेमंत के रवैये से खफा हैं.
चंपाई 7 बार के विधायक हैं और सरायकेला से चुनाव जीतते आ रहे हैं. वे झारखंड की राजनीति में कोल्हान टाइगर नाम से भी जाने जाते हैं. चंपाई का कोल्हान इलाके की 14 विधानसभा सीटों पर खासा प्रभाव है. इससे पहले 21 अगस्त को चंपाई ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था. उन्होंने 1991 में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता था. उसके बाद 1995 में JMM के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते. चंपाई ने JMM सुप्रीमो शिबू सोरेन की अगुवाई में झारखंड आंदोलन (अलग राज्य की मांग) में हिस्सा लिया और आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़कर खुद की अलग पहचान बनाई. वे ट्रेड यूनियन के नेता भी रहे और औद्योगिक शहर जमशेदपुर और आदित्यपुर में कई व्यापारिक आंदोलन चलाए. चंपाई को शिबू सोरेन का वफादार भी माना जाता है. 31 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने जब हेमंत सोरेन को भूमि घोटाले में गिरफ्तार किया, तब चंपाई को विधायक दल का नया चुना नेता गया और उन्होंने 2 फरवरी को झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
6 महीने में कैसे बदल गए राजनीतिक हालात?
दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खनन लीज के आवंटन में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग में पूछताछ के बाद हेमंत को 31 जनवरी की रात गिरफ्तार किया था. उन्होंने जेल जाने से पहले सीएम पद से इस्तीफा दिया था. करीब 5 महीने बाद हेमंत को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और वो रिहा हो गए. ऐसे में चंपाई को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी और 4 जुलाई को एक बार फिर हेमंत ने सीएम पद की शपथ ली.
जब विधानसभा में खुद को कहा- गर्व से कहता हूं हेमंत पार्ट-2 हूं...
फरवरी में जब चंपाई सोरेन सीएम बने और विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की नौबत आई तो उन्होंने खुद को हेमंत सोरेन पार्ट-2 बताया था और जेल भेजे गए हेमंत की खुलकर तारीफ की थी. उन्होंने कहा था, हम गर्व से कहेंगे कि हम पार्ट-2 हैं. हेमंत बाबू हैं तो हिम्मत है. ऐसे में चर्चाएं हैं कि फिर अचानक 5 महीने में ऐसा क्या हो गया, जिससे दोनों नेताओं के बीच दरार पैदा हो गई और नौबत बगावत और पार्टी छोड़ने तक आ गई. इस सवाल का जवाब चंपाई खुद दे रहे हैं.
चंपाई कहते हैं कि 3 जुलाई से पहले मेरे सीएम रहते सारे कार्यक्रम स्थगित किए गए. अपमान किया गया. मुझे विधायक दल की बैठक का एजेंडा तक नहीं बताया गया. बैठक के दौरान मुझसे इस्तीफा मांगा गया. आत्म-सम्मान पर चोट लगने से भावुक हो गया. पिछले चार दशकों के अपने बेदाग राजनैतिक सफर में पहली बार भीतर से टूट गया. तीन दिनों तक अपमानजनक व्यवहार किया गया. उन्हें (हेमंत) सिर्फ कुर्सी से मतलब था. मुझे ऐसा लगा, मानो उस पार्टी में मेरा कोई वजूद ही नहीं है. कोई अस्तित्व ही नहीं है, जिस पार्टी के लिए हमने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. इतने अपमान और तिरस्कार के बाद मैं वैकल्पिक राह तलाशने के लिए मजबूर हो गया. हालांकि, अब तक हेमंत सोरेन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
पहले कल्पना को सीएम बनाए जाने की अटकलें थीं...
हेमंत के जेल जाने के बाद अटकलें थीं कि उनकी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसकी पटकथा लिखे जाने की चर्चाएं भी चल रही थीं. उस समय कल्पना सोरेन विधायक नहीं थीं. कहा गया कि कल्पना को उपचुनाव में उतारा जाएगा और सदन भेजा जाएगा. हालांकि, कयास धरे रह गए और 2 फरवरी को चंपाई सोरेन ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली. 28 जून को हेमंत की रिहाई हो गई और 3 जुलाई को चंपाई को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ गया. यहीं से चंपाई ने हेमंत और JMM के खिलाफ बगावती रुख अपना लिया. हालांकि, उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं किया. लेकिन 18 अगस्त के घटनाक्रम से साफ हो गया था कि चंपाई अपने इस्तीफे के बाद से नाराज चल रहे थे.
3 जुलाई को राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद चंपाई राजभवन से बाहर निकले और मीडिया से बातचीत में कहा था, 'पिछले दिनों राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से मुझे मुख्यमंत्री बनाया गया था. लेकिन हेमंत सोरेन के जेल से बाहर आने के बाद हमारे गठबंधन ने निर्णय लिया है वो फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे.'
चंपाई ने 18 अगस्त को एक्स पर पोस्ट लिखा और इसमें अपना दर्द बयां किया. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर का भी जिक्र किया और 31 जनवरी से अब तक के घटनाक्रम के बारे में सिलसिलेवार बताया. पढ़िए, पोस्ट में क्या लिखा था....
चंपाई के इस लंबे-चौड़े पोस्ट के बाद झारखंड की सियासत में अचानक हलचल तेज हो गई. कहा गया कि चंपाई JMM से बगावत कर सकते हैं और जल्द ही बीजेपी नेतृत्व मिल सकते हैं. इन चर्चाओं पर जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "आप लोग ऐसा सवाल कर रहे हैं, इस पर क्या बोलें, हम तो आपके सामने हैं." इतना बोलते ही वो गाड़ी में बैठ गए. इस सबके बीच बीजेपी के नेता लगातार चंपाई सोरेन की तारीफ कर रहे थे.
इस बीच, चंपई सोरेन 21 अगस्त को दिल्ली पहुंचे. चर्चाएं हुईं कि वो बीजेपी हाईकमान से मिल सकते हैं और JMM छोड़कर बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. हालांकि, दिल्ली में उनकी बीजेपी हाईकमान से मुलाकात नहीं हो सकी. मीडिया ने सवाल किए तो चंपाई का कहना था कि वे निजी काम से दिल्ली गए थे. वहां उनकी फैमिली रहती है. पोते का चश्मा भी ठीक करवाना था. उन्होंने यह भी कहा कि वो राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे. वो अपना नया संगठन बनाएंगे.
चंपाई सोरेन ने तीन विकल्प बताए थे. उन्होंने कहा था कि 'मैं राजनीति से संन्यास नहीं लूंगा. मैंने तीन विकल्प बताए थे, रिटायरमेंट, संगठन या दोस्त. मैं रिटायर नहीं होऊंगा, मैं पार्टी को मजबूत करूंगा, नई पार्टी बनाऊंगा और अगर रास्ते में कोई अच्छा दोस्त मिलता है तो उसके साथ आगे बढ़ूंगा.'
चंपई सोरेन फ्लाइट से कोलकाता से दिल्ली पहुंचे थे. उसी तरह वापसी भी की. दिल्ली से लौटने के बाद वे कोलकाता आए और सड़क मार्ग के जरिए अपने पैतृक गांव सरायकेला गए.
उसके बाद 26 अगस्त को चंपाई फिर दिल्ली पहुंचे और वहां उनकी मुलाकात बीजेपी हाईकमान से हुई. उसके बाद उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का ऐलान कर दिया.
'ये मेरा नया अध्याय है'
26 अगस्त को चंपाई ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा, ये मेरा नया अध्याय है. पहले सोचा संन्यास ले लूं फिर जनता की मांग पर राजनीति में रुकने का फैसला लिया. मंथन के बाद सोचा कि पीएम मोदी के साथ जाना चाहिए. मैं बीजेपी में शामिल होने जा रहा हूं.
चंपाई ने 28 अगस्त को एक्स पर एक और पोस्ट किया और उसमें पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. ये पत्र उन्होंने JMM सुप्रीमो शिबू सोरेन को संबोधित करके लिखा और आंदोलन के दिनों को याद किया. इसके साथ ही उन्होंने शिबू सोरेन में फिर से आस्था जताई और लिखा कि आप सदैव मेरे मार्गदर्शक बने रहेंगे.
आज बीजेपी में एंट्री करेंगे चंपाई सोरेन
रांची के शहीद मैदान में चंपाई सोरेन और उनके बेटे बाबूलाल बीजेपी में शामिल होंगे. इसके लिए बीजेपी ने अभिनंदन सह मिलन समारोह आयोजित किया है. इसमें झारखंड बीजेपी के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान, सह प्रभारी हिमंत बिस्वा सरमा, प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा, नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी समेत अन्य नेता उपस्थित रहेंगे. चंपाई की बीजेपी में एंट्री से पहले पार्टी की एक अहम बैठक भी होगी.
चंपाई के बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी में झारखंड के चार पूर्व सीएम हो जाएंगे. प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी भी सीएम रह चुके हैं. इसके अलावा, अर्जुन मुंडा और रघुबर दास भी सीएम रह चुके हैं. फिलहाल, रघुबर दास ओडिशा के राज्यपाल हैं. मुंडा केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं.
aajtak.in