मध्यकाली युग में छोटानागपुर क्षेत्र के नागा राजवंशों के राजाओं ने यहां शासन किया. ऐसा कहते हैं कि 1931-32 में कोल आंदोलन के समय बख्तर साय ने प्रमुख भूमिका निभाई थी. 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ क्विट इंडिया मूवमेंट भी यहां पर चला था. ब्रिटिश शासन के दौरान गुमला लोहरदगा जिले में था. यहां करीब 1.35 लाख हेक्टेयर में जंगल है. यानी पूरे जिले का 27 फीसदी इलाका जंगलों में हैं. गुमला जिले में 23 बॉक्साइट और 68 स्टोन खानें हैं.
राजनीतिः 2009 से भाजपा के कब्जे में है विधायक की कुर्सी
2005 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के भूषण तिर्की विधायक बने थे. लेकिन 2009 से अब तक इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का ही विधायक कुर्सी पर है. 2009 में भाजपा के कमलेश उरांव जीते थे. इसके बाद 2014 में भाजपा की तरफ से शिवशंकर उरांव विधायक बने. यहां पर धर्म, जातिवाद और आदिवासी मुद्दों पर ही चुनाव लड़ा जाता है.
10.25 लाख आबादी, साक्षरता दर 65.73 फीसदी
2011 की जनगणना के अनुसार गुमला की कुल आबादी 1,025,213 है. इनमें से 514,390 पुरुष हैं और 510,823 महिलाएं हैं. जिले का औसत लिंगानुपात 993 है. जिले की 6.3 फीसदी आबादी शहरी और 93.7 फीसदी ग्रामीण इलाकों में रहती है. जिले की साक्षरता दर 65.73 फीसदी है. पुरुषों में शिक्षा दर 62.56 फीसदी और महिलाओं में 46.58 फीसदी है.
लोहरदगा की जातिगत गणित
गुमला की कुल आबादी में से 487,508 लोग कामगार है. इनमें से 57.2 फीसदी आबादी स्थाई रोजगार में हैं या साल में 6 महीने से ज्यादा कमाई करते हैं.
गुमला के जंगलों को देखना ही अपनेआप में सुकून देने वाला होता है. इसके बावजूद यहां पर कई ऐसे स्थान हैं जहां जाकर आपको अच्छ लगेगा. कामडारा पर्यटन यानी आमटोली में स्थित भगवान शिव का पुराना मंदिर. इसके अलावा यहां पर बासुदेवकोना है. जो अजंता जैसी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है. टांगीनाथ एक मध्यकालीन युग का सबूत है. यहां मंदिर के परिसर में सैकड़ों शिव की मूर्तियां हैं. यहीं पर नागफेनी है. यह जगन्नाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. यहां सांप के आकार में बड़ी चट्टान है. इसके अलावा आंजन गांव है जो भगवान हनुमान की मां देवी अंजनी के नाम पर है. कहते हैं कि देवी अंजनी यहीं एक पहाड़ी गुफा में रहती थीं.
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