झारखंड के चतरा स्थित सिमरिया इलाके के घने जंगल में रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस के क्रैश होने की दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया. इस हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उनकी पत्नी, भांजा (रिश्तेदार), डॉक्टर, पैरामेडिकल और दो पायलट शामिल हैं.
ये विमान (Redbird Airways की Beechcraft C90, VT-AJV) शाम करीब 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ा था, लेकिन खराब मौसम के कारण ATC से संपर्क टूटने के 23 मिनट बाद ही क्रैश हो गया. वहीं, देश में लगातार हो रहे विमान हादसों पर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं.
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हादसे के वक्त एयर एम्बुलेंस में संजय कुमार के साथ उनकी पत्नी बसंती देवी, भांजा ध्रुव, पायलट स्वराज दीप सिंह , सह-पायलट विवेक, मेडिकल टीम के डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा और डॉ विकास भगत सवार थे. सभी की पहचान हो गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.
हादसे में मारे गए 7 लोग
शॉर्ट सर्किट से लगी आग
दरअसल, संजय कुमार चंदवा कस्बे में एक छोटा-सा होटल (ढाबा) चलाते थे. सोमवार को होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में वह गंभीर रूप से झुलस गए थे (करीब 63-65 प्रतिशत जलन). उनका इलाज पहले रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया. बेहतर इलाज की आस में परिवार ने रिश्तेदारों से कर्ज और लोन लेकर करीब 8 लाख रुपये में एयर एम्बुलेंस बुक की थी, ताकि संजय को तुरंत दिल्ली पहुंचाया जा सके. लेकिन एयर एम्बुलेंस उड़ान के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया. तेज हवाओं और खराब विजिबिलिटी के कारण विमान संतुलन खो बैठा और सिमरिया के घने जंगल में क्रैश हो गया. हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला और सभी की मौके पर ही मौत हो गई.
इस हादसे के बारे में जानकारी देते हुए एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने कहा, 'हमें करीब 10 बजे दुर्घटना की सूचना मिली... इलाके की दुर्गमता के कारण यहां पहुंचना मुश्किल था... दिल्ली से एक टीम जांच के लिए यहां आएगी और ब्लैक बॉक्स बरामद करने की कोशिश करेगी... मृतकों की कुल संख्या सात है...'
हादसे में शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'भारत में विमानन क्षेत्र वास्तव में एक खतरनाक स्थिति में है, क्योंकि मंत्रालय सुरक्षा जांच और मानकों का पालन सुनिश्चित करने के अलावा सब कुछ करता है, चाहे उड़ान भरने से पहले हो या लैंडिंग के बाद.'
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