मरीज, पायलट, डॉक्टर... एयर एम्बुलेंस क्रैश में मरने वाले 7 लोग कौन थे?

रांची से दिल्ली आ रहे एयर एम्बुलेंस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जिसमें मरीज संजय, उनकी पत्नी, उनका भांजा, दो डॉक्टर, पायलट और को-पायलट शामिल हैं.

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झारखंड एयर एम्बुलेंस हादसे में 7 लोगों की मौत. (File photo: ITG) झारखंड एयर एम्बुलेंस हादसे में 7 लोगों की मौत. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • रांची,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:59 AM IST

झारखंड के चतरा स्थित सिमरिया इलाके के घने जंगल में रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस के क्रैश होने की दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया. इस हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उनकी पत्नी, भांजा (रिश्तेदार), डॉक्टर, पैरामेडिकल और दो पायलट शामिल हैं.

ये विमान (Redbird Airways की Beechcraft C90, VT-AJV) शाम करीब 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ा था, लेकिन खराब मौसम के कारण ATC से संपर्क टूटने के 23 मिनट बाद ही क्रैश हो गया. वहीं, देश में लगातार हो रहे विमान हादसों पर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं.

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हादसे के वक्त एयर एम्बुलेंस में संजय कुमार के साथ उनकी पत्नी बसंती देवी, भांजा ध्रुव, पायलट स्वराज दीप सिंह , सह-पायलट विवेक, मेडिकल टीम के डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा और डॉ विकास भगत सवार थे. सभी की पहचान हो गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.

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हादसे में मारे गए 7 लोग

  • संजय कुमार (41 वर्ष, मरीज) लातेहार जिले के चंदवा कस्बे (सरोज नगर) के निवासी थे. वह चंदवा शहर में एक छोटा होटल (ढाबा) चलाते थे. दरअसल सोमवार को होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में गंभीर रूप से झुलस गए थे (करीब 65%). उनका इलाज रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर दिल्ली रेफर किया गया था. परिवार ने कर्ज और रिश्तेदारों से उधार लेकर करीब 8 लाख रुपये में एयर एंबुलेंस बुक की थी.
  • अर्चना देवी (संजय कुमार की पत्नी) मरीज के साथ अटेंडेंट के रूप में सवार थीं. परिवार की एकमात्र महिला सदस्य, जिनकी मौत ने घर को पूरी तरह उजाड़ दिया.
  • ध्रुव कुमार (17 वर्ष, संजय का भांजा/रिश्तेदार) सिमडेगा जिले के निवासी थे. वह रांची में पढ़ाई कर रहे थे और मोबाइल इंजीनियरिंग में आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाने वाले थे, लेकिन मामा संजय के झुलसने के बाद रांची रुक गए. बेहतर इलाज के लिए जब संजय को दिल्ली ले जाने का फैसला हुआ तो ध्रुव भी उनके साथ विमान में सवार हो गए.
  • डॉ. विकास कुमार गुप्ता मेडिकल टीम के डॉक्टर थे. वह मरीज की देखभाल के लिए एयर एम्बुलेंस में मौजूद थे.
  • सचिन कुमार मिश्रा पैरामेडिकल/नर्सिंग स्टाफ थे. वह मेडिकल टीम का हिस्सा जो इमरजेंसी के दौरान सहायता कर रहे थे.
  • कैप्टन विवेक विकास भगत (पायलट-इन-कमांड) विमान के मुख्य पायलट थे. रांची के रहने वाले कैप्टन (CPL 18494) के पास 1700 से ज्यादा घंटों का अनुभव था. 
  • कैप्टन सवराजदीप सिंह (सह-पायलट/को-पायलट) विमान को संचालित करने वाली टीम का हिस्सा थे. पंजाब के रहने वाले सवराजदीप के पास कुल 300 से ज्यादा घंटे उड़ान का अनुभव था.

शॉर्ट सर्किट से लगी आग

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दरअसल, संजय कुमार चंदवा कस्बे में एक छोटा-सा होटल (ढाबा) चलाते थे. सोमवार को होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में वह गंभीर रूप से झुलस गए थे (करीब 63-65 प्रतिशत जलन). उनका इलाज पहले रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया. बेहतर इलाज की आस में परिवार ने रिश्तेदारों से कर्ज और लोन लेकर करीब 8 लाख रुपये में एयर एम्बुलेंस बुक की थी, ताकि संजय को तुरंत दिल्ली पहुंचाया जा सके. लेकिन एयर एम्बुलेंस उड़ान के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया. तेज हवाओं और खराब विजिबिलिटी के कारण विमान संतुलन खो बैठा और सिमरिया के घने जंगल में क्रैश हो गया. हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला और सभी की मौके पर ही मौत हो गई.

इस हादसे के बारे में जानकारी देते हुए एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने कहा, 'हमें करीब 10 बजे दुर्घटना की सूचना मिली... इलाके की दुर्गमता के कारण यहां पहुंचना मुश्किल था... दिल्ली से एक टीम जांच के लिए यहां आएगी और ब्लैक बॉक्स बरामद करने की कोशिश करेगी... मृतकों की कुल संख्या सात है...'

हादसे में शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'भारत में विमानन क्षेत्र वास्तव में एक खतरनाक स्थिति में है, क्योंकि मंत्रालय सुरक्षा जांच और मानकों का पालन सुनिश्चित करने के अलावा सब कुछ करता है, चाहे उड़ान भरने से पहले हो या लैंडिंग के बाद.'

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