कश्मीरी पंडित पलायन की 36वीं बरसी के मौके पर जम्मू शहर के बाहरी इलाके जगती में देर रात हजारों कश्मीरी पंडित सड़कों पर उतर आए. पनुन कश्मीर के यूथ विंग के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया, जिसके चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग कई घंटों तक जाम रहा.
प्रदर्शनकारी कश्मीरी पंडितों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी लंबित मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की. उनका कहना था कि बीते तीन दशकों से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास, सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारों को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है.
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प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में कश्मीर घाटी के भीतर विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए एक अलग केंद्र शासित प्रदेश का गठन शामिल है. उनका तर्क था कि बिना अलग प्रशासनिक व्यवस्था के सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी संभव नहीं है. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने संसद में 'एंटी-जेनोसाइड बिल' लाने की भी मांग की.
कश्मीरी पंडितों ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि उन्हें आधिकारिक तौर पर जनसंहार के पीड़ित के रूप में मान्यता दी जाए. उनका कहना था कि 1990 के दशक में हुए पलायन को केवल विस्थापन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित जनसंहार के रूप में देखा जाना चाहिए.
राष्ट्रीय राजमार्ग के जाम रहने से देर रात तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा, जिससे सैकड़ों वाहन फंसे रहे और लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. हालात को संभालने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सिविल प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की.
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हालांकि प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े रहे कि उपराज्यपाल स्वयं मौके पर पहुंचकर उनकी बात सुनें. इसी दौरान एक प्रदर्शनकारी हाईवे पर बने एक कलवर्ट से गिरकर घायल हो गया, जिसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया.
काफी देर बाद प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ. फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल कर दिया गया है, लेकिन कश्मीरी पंडितों की मांगों को लेकर असंतोष अब भी बरकरार है.
सुनील जी भट्ट