'ऐसी सजा देंगे सात पीढ़ियां याद रखेंगी...', आतंकियों को LG मनोज सिन्हा की खुली चेतावनी

जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने आतंकवादियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वो उनके इरादों को कुचल देंगे. उन्होंने आतंकवाद से जुड़े मामलों को फिर से खोलने और दोषियों को सजा देने की घोषणा की. इस दौरान एलजी ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और उनके संघर्ष को याद करते हुए उनकी बहादुरी को भी सराहा.

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LG मनोज सिन्हा ने आतंकी मामलों को दोबारा खोले जाने की बात कही.  (Photo: ITG) LG मनोज सिन्हा ने आतंकी मामलों को दोबारा खोले जाने की बात कही. (Photo: ITG)

सुनील जी भट्ट

  • श्रीनगर,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST

जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने आतंकवादियों को कड़ी चेतावनी दे डाली है. एलजी ने साफ शब्दों में कहा है कि राष्ट्र के खिलाफ षड्यंत्र रचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने इस दौरान कश्मीरी पंडितों का भी जिक्र किया और नरसंहार का बहादुरी से सामना करने के लिए उन्होंने सलाम किया.

मनोज सिन्हा ने कहा, 'आतंकवादियों का समर्थन करने वालों को ऐसी सजा देंगे कि उनकी आने वाली सात पीढ़ियां इसे याद रखेंगी. हम ऐसी स्थिति पैदा करेंगे कि टेरर सिस्टम भीख मांगने पर मजबूर हो जाएगा. हम आतंकवाद को कुचल देंगे.'

एलजी ने आगे भरोसा दिलाया कि वो आतंकवाद से जुड़े मामलों को फिर से खोलेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करने वाले दोषियों को सजा देने का भी आश्वासन दिया.

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कश्मीरी पंडितों को किया सलाम

सिन्हा ने आगे कहा, 'कश्मीरी पंडितों ने अकल्पनीय और अनगिनत मुश्किलों का सामना किया है. मैं उनके धैर्य को सलाम करता हूं. अपने घर से विस्थापित होने के बावजूद, वो फिर से उठे हैं और सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. कश्मीरी पंडित सभी के लिए प्रेरणा हैं. उन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी परंपराओं, संस्कृति और धर्म को जिंदा रखा है.'

यह भी पढ़ें: कश्मीरी पंडित और बांग्लादेश में हिंदुओं के मुद्दे पर क्या बोले CM उमर अब्दुल्ला

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर कही ये बात

जम्मू-कश्मीर के एलजी ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर भी चर्चा की. उन्होंने बताया कि पिछले 37 सालों में उनकी दुर्दशा पर कई किताबें प्रकाशित हुई हैं और कुछ फिल्में भी बनी हैं. उन्होंने कहा, लेकिन एक ऐसा सिस्टम मौजूद है जो इसे दुष्प्रचार कहता है. कश्मीरी पंडितों के दर्द और पीड़ा को दुष्प्रचार कहना कश्मीरी पंडितों के खिलाफ एक और नरसंहार के बराबर है.

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