श्रीनगर से हटाया गया कर्फ्यू, धारा 144 अब भी लागू

श्रीनगर से शनिवार को कर्फ्यू हटा दिया गया जिससे वहां लोगों की और वाहनों की आवाजाही तेज हो गई, वहीं धारा 144 के तहत कश्मीर घाटी में लोगों के एकत्र होने पर अब भी प्रतिबंध लगा हुआ है.

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113 दिनों से घाटी में जीवन अस्त व्यस्त 113 दिनों से घाटी में जीवन अस्त व्यस्त

अमित कुमार दुबे

  • श्रीनगर,
  • 29 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 5:40 PM IST

श्रीनगर से शनिवार को कर्फ्यू हटा दिया गया जिससे वहां लोगों की और वाहनों की आवाजाही तेज हो गई, वहीं धारा 144 के तहत कश्मीर घाटी में लोगों के एकत्र होने पर अब भी प्रतिबंध लगा हुआ है.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शहर के उन छह थाना क्षेत्रों से कर्फ्यू हटा दिया गया है, जहां शुक्रवार को यह लगाया गया था. उन्होंने बताया कि शहर के नौहट्टा इलाके में जामिया मस्जिद तक मार्च निकालने के अलगाववादियों के आह्वान के मद्देनजर कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए शुक्रवार को यहां कर्फ्यू लगाया गया था, लेकिन शनिवार की सुबह स्थिति में सुधार देखते हुए उसे हटा दिया गया.

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113 दिनों से घाटी में जीवन अस्त व्यस्त
अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लोगों की आवाजाही पर कहीं भी प्रतिबंध नहीं है, लेकिन सीआरपीसी की धारा 144 के तहत पूरी घाटी में कहीं भी लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध हैं. उन्होंने कहा कि कर्फ्यू हटाने के बाद शहर में वाहनों और लोगों की आवाजाही में बढ़ोतरी देखी जा रही है. निजी कार और ऑटो रिक्शा भी सड़कों पर पहले की तुलना में अधिक दिखे. टीआरसी चौक-बटमालू में शनिवार को रेहड़ी पटरी वाले भी वापस लौट आए, वहीं श्रीनगर के बाहरी इलाकों और सिविल लाइन में भी कई दुकानें खुलीं. हालांकि लगातार 113वें दिन भी कश्मीर घाटी में अलगाववादियों द्वारा आहूत बंद के कारण आम जनजीवन बाधित रहा.

अलगाववादी समूहों का विरोध प्रदर्शन जारी
अधिकारी ने बताया कि संवेदनशील स्थानों और मुख्य मार्गों के पास ऐहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है, ताकि कानून एवं व्यवस्था बनी रहे और लोग दैनिक कार्य के लिए सुरक्षित महसूस करें. आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ही अलगाववादी समूहों का विरोध प्रदर्शन जारी है. घाटी में जारी झड़पों में अभी तक दो पुलिस कर्मियों समेत 85 लोगों की मौत हो चुकी है और कई हजारों घायल हुए हैं. झड़पों में सुरक्षा बलों के करीब 5,000 कर्मी भी घायल हुए हैं. जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत 300 से अधिक लोगों पर मामला दर्ज किया गया है.

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कश्मीर के एक और स्कूल में आग
उधर दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में शुक्रवार की रात अज्ञात व्यक्तियों ने एक स्कूल में आग लगा दी. इसी के साथ घाटी में चल रही अशांति में इस तरह से आग के हवाले किए गए शैक्षिक संस्थानों की संख्या 20 हो गई है. यह घटना दूरू अनंतनाग में इकरा पब्लिक स्कूल में हुई जहां अज्ञात व्यक्तियों के आग लगाने के कारण इमारत की ऊपरी मंजिल तबाह हो गई. पुलिस और दमकल एवं आपातकालीन सेवाओं के कर्मी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया.

हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी को 8 जुलाई को एक मुठभेड़ में मार गिराने के बाद कश्मीर में शुरू हुए अशांति के दौर में अब तक 20 शैक्षिक संस्थानों को आग लगाकर तबाह कर दिया गया है.

एक अन्य घटना में, गर्मियों की राजधानी के हब्बाकदल क्षेत्र में सत्ताधारी पीडीपी के एक कार्यकर्ता की गाड़ी को अज्ञात व्यक्तियों ने आग लगा दी.

स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश
हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से प्रदर्शन के कारण तकरीबन चार महीने से जम्मू-कश्मीर में सभी शैक्षिक संस्थान बंद हैं. इसी बीच अब प्रशासन ने अगले महीने से स्कूलों के समय में बदलाव की घोषणा कर दी है. श्रीनगर में सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों का समय 1 नवंबर से सुबह 10 बजे से तीन बजे तक होगा और श्रीनगर नगर की सीमा के बाहर समय 11 बजे से 4 बजे तक होगा.

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