'20 करोड़ का कर्ज, जान से मारने की धमकी...', पंचकूला सामूहिक सुसाइड पर मृतक के रिश्तेदार ने क्या-क्या बताया

प्रवीण पर 15-20 करोड़ का कर्ज था. मूल रूप से हिसार के बरवाला के रहने वाले प्रवीण पिछले 12 सालों से पंचकूला में रह रहे थे. कुछ साल पहले हिमाचल प्रदेश के बद्दी में उनकी स्क्रैप फैक्ट्री थी, जिसे बढ़ते कर्ज के कारण बैंक ने जब्त कर लिया था.

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मृतक प्रवीण के मामा के बेटे संदीप अग्रवाल मृतक प्रवीण के मामा के बेटे संदीप अग्रवाल

अमन भारद्वाज

  • पंचकूला,
  • 27 मई 2025,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

पंचकूला में प्रवीण मित्तल ने अपने परिवार के 7 सदस्यों के साथ सामूहिक आत्महत्या कर ली. प्रवीण टैक्सी ड्राइवर का काम करते थे. प्रवीण पर 15-20 करोड़ का कर्ज था. मूल रूप से हिसार के बरवाला के रहने वाले प्रवीण पिछले 12 सालों से पंचकूला में रह रहे थे. कुछ साल पहले हिमाचल प्रदेश के बद्दी में उनकी स्क्रैप फैक्ट्री थी, जिसे बढ़ते कर्ज के कारण बैंक ने जब्त कर लिया था. आर्थिक दबाव का सामना करते हुए प्रवीण अचानक पंचकूला छोड़कर उत्तराखंड के देहरादून चले गए, जहां वे पांच साल तक संपर्क से बाहर रहे. 

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अपने इस कदम के समय उन पर करीब 20 करोड़ रुपये का कर्ज था. बाद में वे मोहाली के खरड़ चले गए और हाल ही में पंचकूला के सकेतड़ी गांव के पास रह रहे थे. खुद का खर्च चलाने के लिए उन्होंने टैक्सी चलाना शुरू कर दिया था. आर्थिक तंगी के कारण बैंक ने पहले ही उनके दो फ्लैट, फैक्ट्री और वाहन जब्त कर लिए थे. पुलिस के मुताबिक प्रवीण ने एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने अनुरोध किया है कि उसका अंतिम संस्कार उसके चचेरे भाई संदीप अग्रवाल ही करें. संदीप ने उससे पांच दिन पहले ही बात की थी.

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2020 से 23 के बीच देहरादून में रहा था परिवार

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प्रवीण और उनका परिवार 2020 से 2023 के अंत तक देहरादून में रहा.  जिस गाड़ी में परिवार ने सुसाइड किया, वह गाड़ी 2021 मॉडल हुंडई ऑरा सीएनजी है. जिसका नंबर UK07DY3055 है. गाड़ी गंभीर सिंह नेगी के नाम पर है. नेगी ने प्रवीण को कार अपने नाम से फाइनेंस करवाई थी. गंभीर नेगी ने इस बात की जानकारी पुलिस को दिए बयान में दी है. 

कर्ज न चुका पाने के कारण मिलती थी जान से मारने की धमकियां

मृतक प्रवीण के मामा के बेटे संदीप अग्रवाल ने बताया कि मृतक मूल रूप से हिसार के बरवाला का रहने वाले थे. करीब 12 साल पहले पंचकूला में शिफ्ट हुए थे और उनकी स्क्रैप की एक फैक्ट्री बद्दी हिमाचल में थी. जिसको बैंक ने सीज़ कर लिया था. जिसका कर्ज काफी हो गया था, जिसके चलते हुए एकदम से पंचकूला से गायब होकर उत्तराखंड के देहरादून में शिफ्ट हो गए थे, 5 साल तक उन्होंने किसी से कोई संपर्क नहीं किया.

फिर कुछ समय पहले मोहाली के खरड़ में आकर रहने लगे. जब वह देहरादून शिफ्ट हुए थे, तब उनके ऊपर करीबन 20 करोड़ रुपए का कर्ज था. कर्ज नहीं देने के चलते उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली थी. फिलहाल टैक्सी चला कर अपनी गुजर बसर कर रहे थे. कर्ज के चलते बैंक ने उनके दो फ्लैट एक फैक्ट्री और गाड़ियां पहले ही जब्त कर ली थी. 
 

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