AI से सीखा तरीका, चीन से मंगाया मैटेरियल और ढाई करोड़ का टारगेट... नकली इंजेक्शन के मास्टरमाइंड की कहानी

ये कहानी गुरुग्राम की है. एक युवक ने अवैध तरीके से कमाई का ऐसा खेल शुरू किया, जो हैरान कर देने वाला है. मर्सिडीज से चलने वाले युवक ने नकली Mounjaro इंजेक्शन बनाने का तरीका यूट्यूब, चैट जीपीटी और गूगल से सीखा. फिर चीन से ऑनलाइन माल मंगवाया. इससे नकली इंजेक्शन तैयार किया. उसका टारगेट महीने में करीब ढाई करोड़ रुपए कमाना था.

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मर्सिडीज से चलता था नकली इंजेक्शन का आरोपी अवि शर्मा. (Photo: Screengrab) मर्सिडीज से चलता था नकली इंजेक्शन का आरोपी अवि शर्मा. (Photo: Screengrab)

नीरज वशिष्ठ

  • गुरुग्राम,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:48 AM IST

गुरुग्राम से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक युवक हाईटेक तरीके से नकली इंजेक्शन का बड़ा खेल करने की तैयारी में था. इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड न तो कोई मेडिकल एक्सपर्ट था और न ही किसी फार्मा कंपनी से जुड़ा हुआ, बल्कि उसने यूट्यूब, गूगल और AI टूल्स की मदद से नकली दवा बनाने का तरीका सीखा.

आरोपी की पहचान अवि एकवीर शर्मा के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम की एक यूनिवर्सिटी से BBA का ड्रॉपआउट है, शुरुआती जांच में सामने आया कि अवि ने पहले आयुर्वेदिक पेन रिलीफ ऑयल की सप्लाई का काम शुरू किया था, लेकिन जल्द ही ज्यादा पैसे कमाने की लालच में उसने नकली इंजेक्शन बनाने का रास्ता चुन लिया.

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पुलिस के मुताबिक, अवि ने खास तौर पर Mounjaro इंजेक्शन को टारगेट किया. यह एक एंटी-डायबिटिक दवा है, जिसका इस्तेमाल वजन कम करने के लिए भी तेजी से बढ़ रहा है. बाजार में इसकी भारी मांग और ऊंची कीमत को देखते हुए उसने इसका नकली वर्जन तैयार करने की योजना बनाई.

यह भी पढ़ें: स्किन डिजीज की दवा, बड़ी कंपनियों का लेबल... गाजियाबाद में नकली दवाओं की फैक्ट्री, पूरे नॉर्थ इंडिया में होती थी सप्लाई

इस प्लान के लिए अवि ने 14 मार्च को चीन की ई-कॉमर्स वेबसाइट अलीबाबा से करीब ढाई लाख रुपये का कच्चा माल मंगवाया. उसका मकसद इस सामान से तैयार नकली इंजेक्शन को करीब 45 लाख रुपये में बेचने का था. इतना ही नहीं, उसने हर महीने ढाई करोड़ रुपये कमाने का टारगेट भी सेट कर रखा था.

जांच में यह भी सामने आया कि अवि ने नकली इंजेक्शन बनाने की पूरी प्रक्रिया इंटरनेट के जरिए सीखी. यूट्यूब वीडियो, गूगल सर्च और AI प्लेटफॉर्म्स की मदद से उसने फॉर्मूले, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की जानकारी जुटाई. यही नहीं, उसने इंजेक्शन की पैकिंग को इतना असली जैसा बनाने की कोशिश की थी कि आम आदमी तो क्या, कई बार मेडिकल स्टाफ भी धोखा खा सकता था.

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18 अप्रैल को पुलिस और ड्रग विभाग की टीम ने गुरुग्राम में छापेमारी की. इस दौरान मौके से नकली इंजेक्शन बनाने का पूरा सेटअप बरामद हुआ. अगले ही दिन, 19 अप्रैल को अवि एकवीर शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया.

ड्रग अधिकारी डॉक्टर अमनदीप चौहान के अनुसार, यह मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि नकली दवाएं सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ करती हैं. खासकर Mounjaro जैसी दवा, जो डायबिटीज और वजन कंट्रोल करने से जुड़ी है, उसका नकली वर्जन बाजार में आना बेहद खतरनाक हो सकता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि अवि इस काम को अकेले ही अंजाम दे रहा था. हालांकि, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल थे या नहीं. फिलहाल पुलिस उसके संपर्कों और सप्लाई चेन को खंगाल रही है. फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है.

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