मौत के बाद भी नहीं सम्मान, 12KM तक ठेले पर शव ले जाने को मजबूर परिवार

फरीदाबाद में महिला की मौत के बाद परिवार को शव मोटराइज्ड ठेले पर घर ले जाने का आरोप लगाते हुए बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं. परिवार ने अस्पताल पर मदद नहीं देने का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन ने प्रक्रिया का हवाला दिया है. मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है.

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ठेले पर शव ले गए परिजन (Photo: Representational) ठेले पर शव ले गए परिजन (Photo: Representational)

aajtak.in

  • फरीदाबाद,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

हरियाणा के फरीदाबाद से एक संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला की मौत के बाद उसके परिवार को शव को मोटराइज्ड ठेले पर करीब 10 से 12 किलोमीटर तक घर ले जाना पड़ा. परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने शव ले जाने के लिए कोई मदद या वाहन उपलब्ध नहीं कराया.

जानकारी के अनुसार 35 साल के अनुराधा देवी लंबे समय से टीबी से पीड़ित थीं और उनका इलाज चल रहा था. इलाज के दौरान बुधवार को बदशाह खान सिविल अस्पताल में उनकी मौत हो गई. महिला के पति झुंझुन का आरोप है कि उन्होंने पत्नी के इलाज में अपनी पूरी जमा पूंजी खर्च कर दी थी और दिल्ली के एम्स समेत कई अस्पतालों में इलाज कराया था.

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पति का कहना है कि पत्नी की मौत के बाद उन्होंने अस्पताल स्टाफ से शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन की मांग की थी, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली. उनका आरोप है कि अस्पताल एंबुलेंस स्टाफ ने उन्हें खुद व्यवस्था करने के लिए कहा. निजी वाहन चालकों ने 500 से 700 रुपये किराया बताया, जो वह देने की स्थिति में नहीं थे.

सिस्टम की बेरुखी या मजबूरी?

इसके बाद परिवार को मजबूर होकर मोटराइज्ड ठेला का इंतजाम करना पड़ा. बताया जा रहा है कि करीब 10-12 किलोमीटर तक पति शव के साथ पैदल चलता रहा, जबकि उनका बेटा मां के शव को कपड़े से ढकता हुआ दिखाई दिया. महिला के अंतिम संस्कार के लिए भी परिवार को पड़ोसियों से उधार लेना पड़ा.

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. बादशाह खान सिविल अस्पताल के सीएमओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकारी एंबुलेंस का उपयोग शव ले जाने के लिए नहीं किया जाता और रेड क्रॉस के माध्यम से शव वाहन उपलब्ध होता है, जिसके लिए औपचारिक अनुरोध जरूरी होता है.

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रेड क्रॉस के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में उन्हें कोई सूचना या कॉल नहीं मिला. वहीं अस्पताल के सिविल सर्जन ने कहा है कि वरिष्ठ डॉक्टरों की एक कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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