'भूतिया साइकिल' सूरत की सड़कों पर दौड़ी... बिना चालक AI तकनीक से चलती अनोखी सवारी ने सबको चौंकाया, Video

सूरत में बीटेक छात्र शिवम मौर्य और गुरप्रीत अरोड़ा ने AI आधारित ‘भूतिया साइकिल’ बनाई, जो बिना चालक सड़क पर चलती है. तीन महीने में तैयार इस प्रोजेक्ट पर करीब 35 हजार रुपये खर्च हुए. साइकिल ऐप, रिमोट और ऑटोमैटिक मोड से कंट्रोल होती है और लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया.

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इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में करीब तीन महीने का समय लगा.(Photo: Screengrab) इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में करीब तीन महीने का समय लगा.(Photo: Screengrab)

संजय सिंह राठौर

  • सूरत,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:00 PM IST

सूरत की सड़कों पर इन दिनों एक अनोखी साइकिल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. बिना किसी चालक के सड़क पर चलती यह साइकिल लोगों को हैरान कर रही है. इसे देखने वाले लोग इसे ‘भूतिया साइकिल’ कह रहे हैं. इस अनोखे आविष्कार को बीटेक के छात्र और ‘क्रिएटिव साइंस’ नाम से मशहूर सोशल मीडिया इनोवेटर शिवम मौर्य ने अपने साथी गुरप्रीत अरोड़ा के साथ मिलकर तैयार किया है.

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करीब तीन महीने की मेहनत के बाद तैयार की गई यह साइकिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम पर काम करती है. सड़क पर बिना किसी इंसान के चलती यह साइकिल ऐसा भ्रम पैदा करती है मानो कोई अदृश्य शक्ति इसे चला रही हो. साइकिल पर इंसानी पैरों जैसा स्ट्रक्चर लगाया गया है, जो चलते समय बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से पैडल मारता दिखाई देता है. यही वजह है कि लोग इसे देखकर चौंक जाते हैं और इसे ‘घोस्ट साइकिल’ कहने लगे हैं.

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इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग 35 हजार रुपये की लागत आई है. इंजीनियरिंग के बेहतरीन इस्तेमाल से यह साइकिल सड़क पर अपना संतुलन खुद बनाए रखती है और किसी व्यक्ति के सहारे के बिना चलती है.

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तीन तरीकों से होती है ऑपरेट

इस साइकिल को चलाने के लिए किसी इंसान की जरूरत नहीं पड़ती. इसे तीन अलग-अलग तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है. पहला तरीका स्मार्टफोन ऐप है, जिसके जरिए मोबाइल से दिशा और नियंत्रण दिया जा सकता है. दूसरा तरीका रिमोट कंट्रोल है, जिससे साइकिल को रिवर्स, फॉरवर्ड और टर्न कराया जा सकता है.

तीसरा और सबसे खास तरीका ऑटोमैटिक मोड है, जिसमें रूट की कोडिंग करके साइकिल को पूरी तरह सेल्फ-ड्राइव मोड पर चलाया जा सकता है. इसके सेंसर्स और सर्किट रास्ते की बाधाओं को पहचानने और दिशा बदलने में मदद करते हैं. यही तकनीक इसे खास बनाती है.

साइकिल के अंदर बैटरी, कंट्रोलर, रास्पबेरी पाई और अन्य छोटे-छोटे उपकरण लगाए गए हैं, जो पूरे सिस्टम को नियंत्रित करते हैं. पुरानी साइकिल का इस्तेमाल कर इसे तैयार किया गया और इसके बैलेंसिंग सिस्टम पर विशेष रिसर्च की गई.

मोटर और लीनियर एक्चुएटर से चलता है सिस्टम

साइकिल के फ्रंट व्हील में मोटर लगाई गई है, जो इसे आगे-पीछे चलाने और स्पीड नियंत्रित करने का काम करती है. हैंडल की दिशा बदलने के लिए लीनियर एक्चुएटर लगाया गया है. यह एक्चुएटर बाहर निकलने और अंदर जाने पर स्टीयरिंग को दाएं-बाएं मोड़ता है.

साइकिल के पैडल और पीछे के पहिए को इस तरह जोड़ा गया है कि जब मोटर आगे का पहिया घुमाती है, तो पीछे का पहिया भी घूमता है और पैडल अपने आप चलने लगते हैं. इससे ऐसा भ्रम पैदा होता है कि कोई अदृश्य व्यक्ति साइकिल चला रहा है.

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यही कारण है कि पहली नजर में देखने पर लोगों को लगता है कि साइकिल खुद ही पैडल मार रही है, जबकि वास्तव में यह पूरी तरह मोटर और तकनीक से संचालित है.

देखें वीडियो...

यूट्यूब चैनल और पुराने इनोवेशन

शिवम मौर्य डिजिटल दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम हैं. उनके यूट्यूब चैनल ‘Creative Science’ के 20 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं. इससे पहले वे बिना ड्राइवर वाली ‘गरुड़ AI बाइक’ बनाकर भी सुर्खियां बटोर चुके हैं.

उनकी संस्था पिछले 8 से 10 वर्षों से वन-टायर स्कूटर, रोबोट रिक्शा और कैप्सूल कार जैसे कई नवाचारों पर काम कर रही है. यह प्रोजेक्ट भी उसी सेल्फ-ड्राइव कॉन्सेप्ट का विस्तार है.

शिवम मौर्य ने बताया कि जब साइकिल सड़क पर चल रही थी, तब लोगों ने इसे ‘भूतिया साइकिल’ कहना शुरू कर दिया. लोगों को लगता था कि कोई अदृश्य शक्ति इसे चला रही है, लेकिन वास्तव में यह पूरी तरह सेल्फ-ड्राइव तकनीक पर आधारित है.

लोगों की प्रतिक्रियाएं और टेस्टिंग

साइकिल की टेस्टिंग के दौरान लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इसे देखकर हैरान रह गए. कई लोग सड़क पर गाड़ियां रोककर वीडियो कॉल के जरिए अपने परिचितों को यह साइकिल दिखाने लगे.

छोटे बच्चे इसे देखकर डरकर अपने माता-पिता के पास भागते नजर आए, जबकि युवाओं में यह जानने की जिज्ञासा थी कि यह तकनीक कैसे काम करती है. लोगों का उत्साह देखकर टीम को उम्मीद से ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली.

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शिवम मौर्य के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में करीब तीन महीने का समय लगा और इसे लोगों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. यह अनोखी ‘भूतिया साइकिल’ अब सूरत में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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