सूरत के डिंडोली इलाके में गत 26 फरवरी को भरी दोपहर में 'महालक्ष्मी ज्वेलर्स' में हुई सनसनीखेज लूट की गुत्थी सुलझ गई है. पुलिस जांच में इस मामले में एक आश्चर्यजनक मोड़ आया है. यह लूट किसी बाहरी अपराधियों ने नहीं, बल्कि ज्वेलर्स के मालिक नारायण पालीवाल ने ही अपने ड्राइवर के साथ मिलकर करवाई थी. पुलिस ने राजस्थान से ड्राइवर को गिरफ्तार कर माल जब्त कर लिया है. जबकि इस लूट की योजना बनाने वाले ज्वैलर्स के मालिक की तलाश की जा रही है.
मालिक ने खुद रची थी साजिश
सूरत शहर के डिंडोली पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले डिंडोली-कराडवा रोड पर स्थित 'श्रीनाथ रेजीडेंसी' में मौजूद 'महालक्ष्मी ज्वेलर्स' में गत 26 फरवरी, 2026 की दोपहर के समय एक अज्ञात नकाबपोश शख्स घुस आया था. उसने मैनेजर को डरा-धमकाकर दुकान से चांदी की 22 मूर्तियां और सोने की 24 जोड़ी बालियां, जो लगभग 35 ग्राम वजन की थीं चुरा ले गया. चोरी हुए माल की कीमत 5.47 लाख रुपये थी.
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घटना की गंभीरता को देखते हुए डिंडोली थाना पुलिस की सर्विलांस टीम ने जांच शुरू की थी. पुलिस ने आसपास के 70 से 80 सीसीटीवी कैमरे चेक किए थे. टेक्निकल सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से पुलिस को सटीक सूचना मिली कि लूट करने वाला शख्स मालिक का ही ड्राइवर जितेंद्र उर्फ किशोर डांगी है. पुलिस को यह भी पता चला कि लूट के बाद माल के साथ ड्राइवर राजस्थान भाग गया है.
सूचना के आधार पर पुलिस की एक टीम तुरंत राजस्थान रवाना हुई थी. जिसके बाद गुजरात-राजस्थान बॉर्डर पर रतनपुर के पास एक होटल से जितेंद्र डांगी को लूटे गए माल के साथ दबोच लिया गया था. हालांकि, जब माल की जांच की गई तो चौंकाने वाला विवरण सामने आया कि लूटे गए गहने सोने के नहीं बल्कि सिर्फ 'पीली धातु' यानी नकली सोने के गहने थे. पकड़े गए ड्राइवर की पूछताछ में ज्वैलर्स के मालिक नारायण पालीवाल के काले कारनामों का पर्दाफाश हुआ.
पुलिस की आरोपी के साथ की गई पूछताछ में सामने आया कि ज्वैलर्स के मालिक नारायण पर लेनदारों का बड़ा कर्ज था. लेनदारों से समय पाने के लिए और अपनी आर्थिक स्थिति खराब दिखाने के लिए उसने यह लूट का नाटक रचा था. मालिक ने ड्राइवर जितेंद्र को इस काम के लिए 4 से 5 लाख रुपये देने और गांव में मकान बनवा देने का लालच दिया था. लूट असली लगे इसके लिए मालिक ने जानबूझकर तिजोरी में नकली गहने रखे थे, ताकि ड्राइवर उन्हें लेकर भाग जाए और पुलिस को ऐसा लगे कि असली सोना लूटा गया.
दोपहर के समय सेल्समैन यानी शिकायत करने वाला व्यक्ति जब महालक्ष्मी ज्वेलर्स में मौजूद था, उसी दौरान करीब दोपहर पौने दो बजे के आसपास काले रंग के कपड़े और मास्क पहने एक व्यक्ति आया. उसने वहां एक धारदार सरिए जैसा हथियार दिखाया और डरा-धमकाकर महालक्ष्मी ज्वैलर्स में चोरी की घटना को अंजाम दिया.
भरे बाजार में यह घटना होने के कारण अपराध की गंभीरता को देखते हुए सूरत क्राइम ब्रांच और डिंडोली पुलिस की टीमों ने समन्वय में रहकर अलग-अलग टीमें बनाई थीं. स्थानीय पुलिस द्वारा करीब 70 से 80 अलग-अलग रूट के सीसीटीवी कैमरे चेक किए गए थे. पुराने मुखबिरों और पहले ऐसे अपराधों में शामिल आरोपियों को ट्रैक किया गया था. इसी दौरान डिंडोली पुलिस स्टेशन के पुलिस सब-इंस्पेक्टर मसाणी को सूचना मिली कि महालक्ष्मी ज्वैलर्स का मालिक नारायण पालीवाल कर्ज में डूबा हुआ था और कई लोग उससे पैसों की उगाही कर रहे थे. इसलिए, मालिक ने ही यह पूरी साजिश रची थी.
मालिक अभी भी है फरार
इस साजिश में उसने अपने ड्राइवर जितेंद्र कुमार उर्फ किशोर वगतराम डांगी को शामिल किया था. जिसने लूट को अंजाम दिया. पुलिस को सूचना मिली थी कि ये दोनों राजस्थान में बिछीवाड़ा के आसपास किसी होटल में रुके हुए हैं, इसलिए डिंडोली पुलिस की टीम ने वहां जाकर जांच की और लूट करने वाले आरोपी जितेंद्र कुमार डांगी को पकड़ लिया. पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार कर लिया और लूट का माल भी बरामद हो गया. आगे की जांच में यह भी सामने आया है कि फरियादी ने जिन सोने की बालियों के लूटे जाने की बात कही थी, वे वास्तव में सोने की नहीं बल्कि नकली बालियां थीं. जिन पर सिर्फ पीला रंग चढ़ा हुआ था. वर्तमान में लूट करने वाले आरोपी जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मालिक नारायण पालीवाल अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है.
संजय सिंह राठौर