सूरत शहर के कपोद्रा इलाके में फुटपाथ पर मां के साथ सो रही साढ़े तीन साल की बच्ची के अपहरण की सनसनीखेज घटना सामने आई थी. कापोद्रा थाना क्षेत्र के नाना वराछा ब्रिज के नीचे रविवार रात एक अज्ञात व्यक्ति बच्ची का अपहरण कर फरार हो गया था. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया और जांच शुरू कर दी गई. शुरुआती जांच में सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें आरोपी बच्ची को ले जाता हुआ दिखाई दिया.
सूरत क्राइम ब्रांच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमों का गठन किया और जांच तेज कर दी. पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद बच्ची को मध्य प्रदेश के रतलाम से सकुशल बरामद कर उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है. हालांकि बच्ची का अपहरण करने वाला आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है और उसकी तलाश जारी है.
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सीसीटीवी फुटेज में रतलाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार की तस्वीरें सामने आईं, जिनमें एक व्यक्ति बच्ची को गोद में उठाकर ले जाता हुआ दिखाई दे रहा था. इसी सुराग के आधार पर पुलिस को शक हुआ कि आरोपी रतलाम के आसपास हो सकता है.
48 घंटे की लगातार कार्रवाई
सूरत क्राइम ब्रांच की पांच अलग-अलग टीमों ने सुराग जुटाने शुरू किए. जांच के दौरान पता चला कि बच्ची को रतलाम से करीब 50 किलोमीटर दूर बाजना गांव से बरामद किया गया. 48 घंटे तक लगातार कार्रवाई के बाद बच्ची को सूरत लाकर माता-पिता को सौंप दिया गया. बच्ची के मिलते ही मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
जांच में यह भी सामने आया कि देवभूमि द्वारका के भाणवड़ तहसील की 30 वर्षीय महिला अपने पति से झगड़े के बाद दो दिन पहले ही अपनी बेटी को लेकर सूरत आई थी. यहां वह एक परिचित रिक्शा चालक के साथ नाना वराछा ब्रिज के नीचे फुटपाथ पर रह रही थी. 20 अप्रैल को दिनभर मजदूरी के बाद रात करीब 8 बजे मां-बेटी सो गई थीं.
रात करीब एक बजे महिला की नींद खुली तो बच्ची गायब थी. इसके बाद तुरंत कापोद्रा पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई.
सीसीटीवी से रेलवे स्टेशन तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान सामने आया कि 30 वर्षीय एक व्यक्ति रात 9:30 बजे बच्ची को उठाकर रिक्शा से सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचा था. कैमरों में यह भी कैद हुआ कि वह रात 10:10 बजे रवाना होने वाली दौंड-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुआ. पुलिस ने 20 से अधिक जवानों की अलग-अलग टीमें बनाई और रेलवे स्टेशनों तथा आरपीएफ को अलर्ट कर दिया गया.
पुलिस का मानना था कि यह अपहरण पूर्व नियोजित साजिश थी, क्योंकि आरोपी ने बच्ची को उठाने के तुरंत बाद ट्रेन पकड़ ली थी. इसके बाद क्राइम ब्रांच ने 10 स्टेशनों के आरपीएफ और स्थानीय पुलिस से संपर्क कर आरोपी की फोटो साझा की. जब कोई ठोस जानकारी नहीं मिली, तो पांच विशेष टीमें बनाई गईं और अलग-अलग स्टेशनों की जिम्मेदारी सौंपी गई.
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रतलाम से बाजना गांव तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान सुराग मिला कि आरोपी बच्ची के साथ रतलाम स्टेशन पर उतरा था. सीसीटीवी जांच से पता चला कि वह वहां से टेंपो और फिर बस में सवार हुआ. पुलिस ने बस चालक से पूछताछ की, जिसने बताया कि आरोपी और बच्ची को रतलाम से 50 किलोमीटर दूर बाजना गांव में उतारा गया था.
सुबह पांच बजे पुलिस बाजना गांव पहुंची. वहां सीसीटीवी नहीं होने के कारण पुलिस ने ग्रामीणों को जगाकर आरोपी की फोटो दिखाई. एक ग्रामीण ने आरोपी और बच्ची की पहचान कर ली, जिसके बाद बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया.
आरोपी की तलाश जारी
डीसीपी भावेश रोजिया ने बताया कि क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की कई टीमों ने पूरी रात जांच की और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद बच्ची को सुरक्षित छुड़ाया गया. पुलिस ने बच्ची को उसकी मां को सौंप दिया है.
पुलिस का कहना है कि यदि 48 घंटे तक लगातार कार्रवाई नहीं होती, तो बच्ची को वापस लाना मुश्किल हो सकता था. फिलहाल क्राइम ब्रांच की दो टीमें आरोपी की तलाश में तैनात हैं और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है.
संजय सिंह राठौर