राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गुजरात यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित प्रदर्शनी का विरोध करना NSUI के नेताओं और छात्रों को भारी पड़ गया है. गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपति के आदेश पर NSUI के 9 नेताओं और छात्रों के कैंपस में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है और उनके एडमिशन रद्द करने का आदेश जारी किया गया है. इस संबंध में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा आधिकारिक पत्र जारी किया गया है, जिसके बाद छात्र संगठन NSUI ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है.
जानकारी के अनुसार, गुजरात यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित अटल कलाम सेंटर में भारत शोध संस्थान और भारतीय विचार मंच द्वारा प्रमाणभूत संशोधन दस्तावेजों की प्रदर्शनी आयोजित की गई थी. यह प्रदर्शनी RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 16 फरवरी से भारत शोध संस्थान और गुजरात यूनिवर्सिटी द्वारा भारतीय विचार मंच के सहयोग से लगाई गई थी. इस प्रदर्शनी का 23 फरवरी को गुजरात NSUI के छात्र और नेताओं ने विरोध किया और प्रदर्शनी में लगे पोस्टरों को फाड़ दिया था.
विरोध के बाद कार्रवाई, 9 नेताओं पर प्रवेशबंदी और एडमिशन रद्द
प्रदर्शनी में विरोध और पोस्टर फाड़ने की घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए NSUI के नेताओं को हिरासत में लिया था. इसके बाद गुजरात यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने कुलपति के आदेशानुसार NSUI के छात्र और नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की घोषणा की. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने NSUI के नेता नारायण भरवाड़, चिराग दरजी, यशराजसिंह खैर, संजय सोलंकी, शिवराजसिंह बारड, मीत पनारा, हर्ष चौहान, पृथ्वी देसाई और कशिश डामोर समेत पुलिस जांच में सामने आने वाले सभी लोगों के कैंपस में प्रवेश पर प्रतिबंध और उनके एडमिशन रद्द करने का आदेश जारी किया है.
यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ने इस कार्रवाई के पीछे कारण बताते हुए कहा कि 23 फरवरी को प्रदर्शनी में भारत माता, डॉ. बाबा साहब आंबेडकर, महात्मा गांधी, सरदार पटेल और वी.डी. सावरकर समेत भारत के महान व्यक्तित्वों का अपमान किया गया और हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम हुआ. इसी आधार पर कुलपति ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
NSUI ने लगाया विचारधारा थोपने का आरोप, आंदोलन की चेतावनी
इस कार्रवाई के बाद NSUI के नेताओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के फैसले का विरोध किया है. उनका कहना है कि गुजरात यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था, जहां छात्रों के भविष्य का निर्माण होना चाहिए, वहां शिक्षा के बजाय एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग RSS के साथ मिलकर शैक्षिक माहौल को राजनीतिक रंग देने का काम कर रहे हैं और यूनिवर्सिटी को प्रचार का मंच बनाया जा रहा है.
गुजरात NSUI के प्रदेश प्रमुख नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि RSS द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देश का गलत इतिहास प्रस्तुत कर छात्रों को भ्रमित किया गया, जिसका NSUI ने विरोध किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति और रजिस्ट्रार ने RSS के दबाव में आकर NSUI नेताओं के खिलाफ गलत एफआईआर दर्ज कराई है और उनके एडमिशन रद्द करने व प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूनिवर्सिटी प्रशासन जल्द ही इस फैसले को वापस नहीं लेता, तो NSUI कैंपस में उग्र विरोध प्रदर्शन करेगा.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और भारतीय विचार मंच का बयान
इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है. गुजरात के बनासकांठा से कांग्रेस सांसद गेनीबेन ठाकोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करते हुए कहा कि गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपति की निष्क्रियता चिंताजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ ABVP के प्रदर्शन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि दूसरी तरफ शांतिपूर्ण विरोध करने वाले NSUI छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी विचार और चर्चा का केंद्र होना चाहिए, किसी एक विचारधारा का मंच नहीं.
वहीं, भारतीय विचार मंच के महामंत्री ईशान जोशी ने कहा कि NSUI नेताओं ने यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रदर्शनी के पोस्टर और बैनर को नुकसान पहुंचाया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि किसी विचार से असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और अपशब्दों का प्रयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा नहीं हो सकता. उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से घटना की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने और कैंपस में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की.
अतुल तिवारी