10 हजार की आबादी, अरबों का टर्नओवर, एक भी पुलिस थाना नहीं... हैरत में डाल देगी गुजरात के NRI गांव की कहानी

महज 10 हजार की आबादी, अरबों का टर्नओवर, और एक भी पुलिस थाना नहीं... हम बात कर रहे हैं गुजरात के एक ऐसे गांव की, जिसे एनआरआई गांव भी कहा जाता है. इसे गांव कहें या कोई यूरोपीय शहर? यहां करीब 13 से ज्यादा नेशनल और प्राइवेट बैंक हैं, किसान भी करोड़पति हैं. आखिर बिना पुलिस और बिना सरकारी मदद के ये गांव कैसे बना ग्लोबल मॉडल? जानिये पूरी कहानी.

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गुजरात के एनआरआई गांव की कहानी. (Photo: ITG) गुजरात के एनआरआई गांव की कहानी. (Photo: ITG)

हेताली शाह

  • आणंद,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:57 PM IST

देश के गांवों की जो तस्वीर आमतौर पर हमारे जहन में होती है, यह रिपोर्ट उसे पूरी तरह बदल देने वाली है. कच्ची सड़कें, सीमित सुविधाएं और सरकारी मदद पर निर्भर गांव... लेकिन गुजरात के आनंद जिले का धर्मज गांव इन सब धारणाओं को तोड़ता है. यह एक ऐसा गांव है, जहां खेतों से ज्यादा बैंकों की चर्चा होती है, जहां गलियों में धूल नहीं, बल्कि तरक्की की चमक दिखाई देती है. 

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सबसे हैरान करने वाली बात... करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी पुलिस थाना नहीं है. इसके बावजूद यहां अपराध नहीं, बल्कि अनुशासन और भाईचारा कायम है. यही वजह है कि धर्मज को आज देश ही नहीं, दुनिया भर में NRI गांव के नाम से जाना जाता है.

आनंद जिले के चरोतर क्षेत्र में स्थित धर्मज गांव में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप किसी विकसित यूरोपीय कस्बे में आ गए हों. चौड़ी और साफ सड़कें, शानदार ड्रेनेज सिस्टम, दूधिया स्ट्रीट लाइट्स और हर कोने में आधुनिक सुविधाएं.

इस गांव की आर्थिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां मौजूद बैंकों में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा है. यही कारण है कि धर्मज जैसे गांव में 13 से अधिक नेशनल और प्राइवेट बैंकों की शाखाएं हैं. यहां का किसान भी करोड़पति है और गांव की अर्थव्यवस्था किसी शहर से कम नहीं.

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19वीं सदी में पड़ी तरक्की की नींव

धर्मज की इस बेमिसाल तरक्की की नींव 19वीं सदी में ही पड़ गई थी. समय के साथ यहां के लोग रोजगार और व्यापार के लिए विदेश गए, लेकिन अपनी मिट्टी से नाता कभी नहीं तोड़ा.

आज इस गांव का शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जिसका कोई सदस्य विदेश में न रहता हो. ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका जैसे देशों में करीब 3,000 परिवार बसे हुए हैं. लेकिन ये प्रवासी भारतीय सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अपने गांव के विकास को ही अपना असली मिशन बना लिया.

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हर साल धर्मज डे मनाया जाता है, जहां दुनियाभर से NRI अपने गांव लौटते हैं और गांव के विकास के लिए खुलकर योगदान देते हैं. स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी, शिक्षा... हर क्षेत्र में यह सहयोग साफ दिखाई देता है.

बिना पुलिस, फिर भी पूरी शांति

धर्मज की सबसे बड़ी और अनोखी पहचान है यहां की शांति. 10 हजार से ज्यादा की आबादी, लेकिन गांव में न तो कोई पुलिस थाना है और न ही अपराध का डर. यहां न एफआईआर होती है, न मुकदमेबाजी. अगर कभी कोई विवाद उत्पन्न भी हो जाए, तो गांव के बुजुर्ग, पंचायत और युवा आपसी सहमति से उसे सुलझा लेते हैं. यहां पुलिस की लाठी से ज्यादा असर आपसी विश्वास और भाईचारे का है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने उन्हें सिखाया कि चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न चले जाएं, अपनी जड़ों को कभी मत भूलिए. यही संस्कार आज धर्मज की पहचान बन चुके हैं.

सुविधाएं जो शहरों को भी मात दें

धर्मज में मौजूद सुविधाएं कई मेट्रो शहरों को भी शर्मिंदा कर दें. गांव में हाई-स्पीड वाई-फाई, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, और 24 घंटे साफ पानी की व्यवस्था है. स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो यहां आई हॉस्पिटल, गायनेक सेंटर, फिजियोथेरेपी क्लिनिक और अन्य चिकित्सा सुविधाएं बेहद कम खर्च में उपलब्ध हैं.

आस्था और सेवा का केंद्र है जलाराम मंदिर, जहां की रसोई से कोई भी भूखा नहीं लौटता. यहां सेवा को धर्म माना जाता है और यह भावना गांव के हर व्यक्ति में दिखाई देती है.

100 साल पुरानी विरासत आज भी जीवित

धर्मज सिर्फ आधुनिकता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 100 साल पुरानी हेरिटेज के लिए भी जाना जाता है. गांव में आज भी ऐसे पुराने घर मौजूद हैं, जिन्हें देखकर लगता है मानो वे अभी-अभी बनाए गए हों. इन घरों की दीवारों पर मोर, कृष्ण, हाथी और पौराणिक कथाओं की अद्भुत कलाकृतियां उकेरी गई हैं. यह गांव इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चल सकती हैं.

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यही वजह है कि यहां काम करने वाले बैंक कर्मचारी, शिक्षक और डॉक्टर भी धर्मज में रहना पसंद करते हैं. साफ वातावरण, सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाएं इसे रहने के लिए आदर्श बनाती हैं.

गांव के लोगों ने क्या कहा?

गांव में रहने वाले घनश्याम पटेल ने कहा कि मैं अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी से आया हूं. मुझे तीन दिन हुए हैं. आज धर्मज डे सेलिब्रेशन है. उसके लिए हमारे मन में स्पेशल प्लेस है. हम चाहते हैं कि हमारी जेनरेशन यहां आए और देखे कि हमारी धरोहर क्या है, हमारी संस्कृति क्या है. आज करीब 650 एनआरआई यहां आने वाले हैं. मुंबई, बेंगलुरु आदि शहरों से भी लोग आ रहे हैं. हमारा उद्देश्य है कि हम सब एक जगह मिलें. धर्मज में दस हजार की आबादी के बीच मेट्रो सिटी जैसी सुविधाएं हैं.

वहीं मीना पटेल ने कहा कि हमारा गांव पहले से ही काफी एडवांस है. हर साल जनवरी में हम धर्मज डे सेलिब्रेट करते हैं. इस मौके पर एनआरआई इकट्ठे हो जाते हैं. यहां सभी एजुकेशन, मेडिकल जैसी सभी सुविधाएं हैं. घर-घर में फिल्टर वॉटर सप्लाई होता है.

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धर्मज का मैसेज... एक गांव, एक सोच

धर्मज ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि अगर प्रवासी भारतीय और स्थानीय समुदाय एकजुट हो जाएं, तो बिना सरकारी इमदाद के भी विकास का स्वर्ग रचा जा सकता है. धर्मज सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक सोच है- ऐसी सोच जो बताती है कि पैसा कमाना बड़ी बात नहीं, लेकिन उस पैसे से अपनी जड़ों को सींचना ही असली कामयाबी है.

आज धर्मज की चकाचौंध के पीछे सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि हर धर्मजवासी का समर्पण, एकता और अपने गांव के प्रति अटूट प्रेम है. यही वजह है कि बिना पुलिस थाने के भी यह गांव शांति, समृद्धि और विकास की मिसाल बना हुआ है.

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