गुजरात की राजधानी गांधीनगर में एक बड़े सरकारी अधिकारी को ACB यानी भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने रंगेहाथ पकड़ा. अधिकारी का नाम है उपेंद्र सुतरिया, जो गांधीनगर नगर निगम में टैक्स कलेक्टर और इंचार्ज असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर थे. यानी क्लास वन अधिकारी कोई छोटा-मोटा बाबू नहीं. इन्हें 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए उन्हीं के ऑफिस में गिरफ्तार किया गया.
एक व्यापारी गाड़ियों की खरीद-बिक्री का काम करता है. उसने एक गाड़ी बेची थी जिसमें नगर निगम के टैक्स को लेकर कुछ गड़बड़ी हो गई.
अब इस गड़बड़ी को सुलझाना था. लेकिन उपेंद्र सुतरिया ने सुलझाने की बजाय मौका देख लिया. उन्होंने व्यापारी से कहा, "1 लाख रुपये दो, तभी तुम्हारी एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी. लाइसेंस रद्द नहीं होगा. और यह मामला भी शांत हो जाएगा." यानी साफ धमकी - पैसे दो, वरना तुम्हारा धंधा बंद करवा देंगे.
व्यापारी ने क्या किया?
व्यापारी डरा नहीं. उसने रिश्वत देने से साफ मना कर दिया और सीधे ACB के पास पहुंच गया. ACB ने शिकायत सुनी और जाल बिछाने की तैयारी शुरू की.
कैसे पकड़ा?
ACB के अफसर DA चौधरी की निगरानी में इंस्पेक्टर एमएम सोलंकी की टीम बनाई गई. प्लान यह था कि व्यापारी अधिकारी के ऑफिस जाए, बात करे और जब अधिकारी पैसे ले तभी टीम अंदर आए. और यही हुआ. उपेंद्र सुतरिया ने व्यापारी से बात की, 1 लाख रुपये हाथ में लिए और उसी वक्त ACB की टीम ने उन्हें उनके ही ऑफिस में रंगेहाथ दबोच लिया.
अब आगे क्या होगा?
ACB ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज कर लिया है. साथ ही जांच भी शुरू हो गई है. उनके घर और जुड़ी संपत्तियों की जांच होगी. पिछले कई महीनों में उन्होंने जो भी लाइसेंस दिए या काम मंजूर किए वो सब भी खंगाले जाएंगे. यानी सिर्फ यह 1 लाख की रिश्वत नहीं - पूरा हिसाब-किताब खुलेगा.
असर क्या हुआ?
इस गिरफ्तारी के बाद नगर निगम के दफ्तर में हड़कंप मच गया है. कई अधिकारी और कर्मचारी डरे हुए हैं. जब इतना बड़ा क्लास वन अधिकारी पकड़ा जा सकता है, तो बाकी भी सोच रहे हैं कि अगला नंबर किसका है.
अतुल तिवारी