सूरत के अस्पताल में आसाराम की फोटो लगाकर आरती और पूजा करने के बाद विवाद

सूरत सिविल अस्पताल में आसाराम बापू के अनुयायियों द्वारा उनकी फोटो लगाकर पूजा करने से विवाद खड़ा हो गया. अस्पताल प्रशासन ने कहा कि अनुमति सिर्फ मरीजों को फल बांटने की दी गई थी, पूजा की नहीं. वीडियो वायरल होने के बाद सुरक्षा गार्ड को हटाया गया. आसाराम पहले से ही दो अलग-अलग रेप मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा है.

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वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. (Photo: Screengrab) वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. (Photo: Screengrab)

संजय सिंह राठौर

  • सूरत,
  • 23 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

गुजरात के सूरत सिविल अस्पताल में रविवार को आसाराम बापू के अनुयायियों ने उनकी फोटो लगाकर पूजा-अर्चना की. वे यहां मरीजों को फल बांटने के लिए आए थे, लेकिन फोटो लगाकर आरती और पूजा करने से विवाद पैदा हो गया.

अस्पताल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. केतन नाइक ने बताया कि अनुमति केवल फल बांटने की दी गई थी. उन्होंने कहा, 'फोटो लगाकर पूजा करने की अनुमति नहीं थी. यह गलत हुआ है और ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए.'

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पूजा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अस्पताल प्रबंधन आलोचना का शिकार हो गया. मामले की गंभीरता देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड को हटा दिया.

आसाराम दो रेप मामलों में दोषी
गौरतलब है कि आसाराम पहले से ही दो रेप मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा है. पहला गांधीनगर केस (2013) में एक महिला शिष्या से 2001 से 2006 के बीच कई बार यौन शोषण करने के मामले में दोषी पाए गए. दूसरा राजस्थान केस (2013) नाबालिग लड़की से रेप के मामले में भी आसाराम को उम्रकैद की सजा दी गई है.

कई धाराओं में दोषी है आसाराम
गांधीनगर की अदालत ने आसाराम को आईपीसी की कई धाराओं में दोषी ठहराया था, जिनमें रेप, अप्राकृतिक अपराध, महिला की अस्मिता भंग करना, अवैध कैद और धमकी देने जैसे अपराध शामिल हैं.

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अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं. लोगों ने कहा कि एक रेप के दोषी को इस तरह से सम्मानित करना समाज के लिए गलत संदेश देता है.

भविष्य में सख्ती का आश्वासन
अस्पताल प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि आगे से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए और सख्ती बरती जाएगी. उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा के नाम पर किसी भी धार्मिक या विवादित गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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