'थोपा जा रहा कानून, ये मुस्लिमों को अधिकारों का उल्लंघन', गुजरात UCC कानून को ओवैसी ने बताया असंवैधानिक

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात विधानसभा में पारित समान नागरिक संहिता (UCC) और डिस्टर्बड एरिया एक्ट संशोधन बिल को असंवैधानिक करार दिया है. उन्होंने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए भाजपा सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

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गुजरात यूसीसी का ओवैसी ने किया विरोध. (PTI photo) गुजरात यूसीसी का ओवैसी ने किया विरोध. (PTI photo)

अतुल तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 05 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात विधानसभा द्वारा हाल ही में पारित समान नागरिक संहिता विधेयक और डिस्टर्बड एरिया एक्ट में संशोधन को असंवैधानिक करार दिया है. उन्होंने कहा कि ये विधेयक मुस्लिमों के अधिकारों का उल्लंघन करता है.

दरअसल, गुजरात विधानसभा ने पिछले हफ्ते सात घंटे से अधिक की मैराथन बहस के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पास किया था. इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सभी धर्मों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है, चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म का हो.

बिल में बल, दबाव या धोखाधड़ी से किए गए विवाहों के लिए सात साल की जेल की सजा का प्रावधान है, साथ ही द्विविवाह और बहुविवाह पर भी रोक है. इसके तहत विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य है.

विधानसभा ने गुजरात प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेस इन डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट 1991 में संशोधन वाला विधेयक भी पास किया.

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'धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन'

ओवैसी ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि यूसीसी एक निर्देशक सिद्धांत है, मौलिक अधिकार नहीं. इसका उल्लेख संविधान के आर्टिकल 44 में किया गया है. संविधान सभा की बहस के दौरान बाबासाहेब अंबेडकर ने यह नहीं कहा था कि संहिता बनने के बाद राज्य इसे सभी नागरिकों पर लागू करेगा. ये संहिता केवल उन लोगों पर लागू होगी जो घोषणा करते हैं और स्वेच्छा से इसके पालन के लिए सहमत होते हैं.

उन्होंने मीडिया को बताया कि ये विधेयक उत्तराखंड में पारित विधेयक की हूबहू नकल है, जिसमें हिंदू विवाह और तलाक अधिनियम और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम को अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर सभी समुदायों पर लागू किया गया है, इसलिए ये एक समान विधेयक नहीं है.

'ये सब हिंदू धर्म का हिस्सा'

हैदराबाद के सांसद ने आरोप लगाया कि ये मुसलमानों के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है. पीड़ित पक्ष मुसलमान हैं. ये असंवैधानिक है, अगर अब किसी को तलाक लेना हो तो उन्हें एडल्ट्री (व्यभिचार) साबित करना होगा और न्यायिक हिरासत में रहना होगा. ये सब हिंदू धर्म का हिस्सा है. आप इसे हम (मुसलमानों) पर क्यों लागू कर रहे हैं?.

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ओवैसी ने लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य (जरूरी) पंजीकरण और इसमें जेल की सजा के प्रावधान पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ये विवाह की पवित्रता को खत्म करता है और इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है.

डिस्टर्बड एरिया एक्ट में संशोधन को लेकर भी ओवैसी ने बीजेपी पर निशाना साधा. नए प्रावधान के तहत अब संपत्ति की खरीद-बिक्री में तीसरा व्यक्ति भी आपत्ति दर्ज करा सकता है.

BJP पर साधा निशाना

ओवैसी का दावा है कि 'पीड़ित व्यक्ति' की परिभाषा को व्यापक बनाकर बीजेपी ने संपत्ति सौदों में कमीशनखोरी को कानूनी रूप दे दिया है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी का दावा है कि गुजरात एक शांतिपूर्ण राज्य है,  अगर गुजरात वाकई एक शांत राज्य है तो ऐसे संशोधनों की जरूरत ही नहीं होती.

ओवैसी ने साफ की रणनीति

इसके अलावा ओवैसी ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी गुजरात की छह नगर निगमों, 29 तालुका पंचायतों और 28 जिला पंचायतों में चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने कुल 539 उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का फैसला किया है.

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि वे इन कानूनी बदलावों और जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे. उन्होंने अदालतों के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए इन कानूनों को कानूनी चुनौती देने के भी संकेत दिए हैं.

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