सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पार्क में स्थित ए. एन. झा डियर पार्क पर बड़ा निर्णय सुनाते हुए कहा है कि सिर्फ 38 हिरण ही यहां रहेंगे. इनमें 15 हिरण और 23 हिरणियां होंगी. बाकी बचे सैकड़ों हिरणों को अन्य वन्यजीव अभयारण्यों में शिफ्ट किया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अधिकृत समिति यानी सीईसी की रिपोर्ट में की गई सिफारिशें स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि डियर पार्क में अधिकतम 38 हिरण ही रखे जा सकते हैं. शेष हिरणों को उपयुक्त वन्यजीव अभयारण्यों में शिफ्ट किया जाएगा. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
डियर पार्क में हिरणों की संख्या काफी बढ़ जाने के चलते उन्हें राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व भेजने की योजना बनाई गई है. इसका विरोध करते हुए एक पर्यावरण संस्था ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. संस्था ने हिरणों को बाहर भेजने की बजाय पार्क का ही क्षेत्रफल बढ़ाने का आग्रह किया, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे नहीं माना. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने भी हिरणों के स्थानांतरण को सही माना है.
कोर्ट ने कहा है कि इससे न सिर्फ कम क्षेत्र में रह रहे हिरणों को बेहतर आवास मिलेगा, बल्कि टाइगर रिजर्व में शिकार की उपलब्धता भी बढ़ेगी. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वन्यजीवों को पिंजरों या सीमित बाड़ों में रखना सामान्य स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
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साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण को हिरणों की देखभाल के लिए बेहतर ढांचा, संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए. डियर पार्क के “संरक्षित वन” के दर्जे को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया.
अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय को सीईसी द्वारा तैयार वैज्ञानिक दिशानिर्देशों को छह महीने में लागू करने और उन्हें कानूनी दर्जा देने पर विचार करने को कहा. सीईसी की रिपोर्ट में हिरणों की अनियंत्रित बढ़ती संख्या और प्रबंधन में कमी को स्थानांतरण का मुख्य कारण बताया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2027 को होगी.
संजय शर्मा