खुद को PM मोदी का करीबी बताकर की थी 1.10 करोड़ की ठगी, तीन साल बाद सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों से पैसे वसूलने के आरोपी मोहम्मद कासिफ को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है. कासिफ करीब तीन साल से जेल में बंद था. ईडी ने उस पर मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी तस्वीरों के जरिए प्रभाव जमाने और सरकारी नौकरी व ठेके दिलाने के नाम पर ठगी करने का आरोप लगाया था.

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सुप्रीम कोर्ट. (File photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट. (File photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों का करीबी होने का दावा कर लोगों से पैसे वसूलने के आरोपी मोहम्मद कासिफ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने करीब तीन साल से जेल में बंद कासिफ को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. कासिफ पर मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई गंभीर आरोप लगे हैं. यह मामला गौतम बुद्ध नगर के सूरजपुर थाने में दर्ज एक FIR से जुड़ा हुआ है. इसी FIR के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने अप्रैल 2023 में ECIR दर्ज की थी. FIR में कासिफ के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट से जुड़े आरोप लगाए गए थे. इसके बाद 25 मई 2023 को उसे हिरासत में लिया गया था और तब से वह जेल में बंद था.

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मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कासिफ की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले का ट्रायल लगातार आगे बढ़ रहा है और अभियोजन पक्ष की तरफ से कोई अनावश्यक देरी नहीं की गई. कोर्ट ने यह भी कहा था कि जो भी देरी हुई, वह आरोपी की ओर से दाखिल की गई विभिन्न अर्जियों की वजह से हुई.

सरकारी नौकरी और ठेके दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर ध्यान दिया कि मोहम्मद कासिफ लगभग तीन साल से जेल में बंद है. कोर्ट ने कहा कि मामले में कथित प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी अपराध से अर्जित रकम करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये बताई गई है. इन परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि यदि मोहम्मद कासिफ जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है या जांच और ट्रायल में सहयोग नहीं करता है, तो ED ट्रायल कोर्ट में उसकी जमानत रद्द कराने की अर्जी दाखिल कर सकती है. ईडी के मुताबिक मोहम्मद कासिफ सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ अपनी मॉर्फ्ड और एडिटेड तस्वीरें पोस्ट करता था. इन तस्वीरों के जरिए वह खुद को बड़े नेताओं और सरकारी अधिकारियों का करीबी बताने की कोशिश करता था.

ईडी का दावा, आरोपी के ठिकानों से मिले 1.10 करोड़ रुपये

जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर वह लोगों से सरकारी नौकरी दिलाने, सरकारी ठेके दिलाने और विभिन्न विभागों में काम करवाने के नाम पर पैसे वसूलता था. ईडी ने यह भी दावा किया कि कासिफ से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 1 करोड़ 10 लाख रुपये से अधिक की रकम बरामद हुई थी. एजेंसी के अनुसार यह रकम अपराध से अर्जित धन हो सकती है. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोहम्मद कासिफ को जमानत पर रिहा किया जाएगा, जबकि मामले की जांच और ट्रायल आगे जारी रहेगा.

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