दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, AAP नेता मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को शुक्रवार को आरोपमुक्त करने वाले स्पेशल जज जितेंद्र प्रताप सिंह इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर चुके हैं. इनमें कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह से जुड़ा मामला भी शामिल है, जिसमें प्रसिद्ध पेंटर एम एफ हुसैन की पेंटिंग्स से संबंधित केस दोबारा खोलने का आदेश दिया गया था.
जज ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी गई थी. अदालत ने कहा था कि आपराधिक न्यास भंग के मामले में उनके खिलाफ आगे कार्रवाई करने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं.
कौन हैं जज जितेंद्र प्रताप सिंह?
वर्तमान में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जितेंद्र प्रताप सिंह दिल्ली न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं. शुक्रवार को उन्होंने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया, के कविता और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त करने के आदेश देकर सुर्खियां बटोरीं.
जितेंद्र प्रताप सिंह केंद्रीय एजेंसियों, विशेष रूप से सीबीआई की ओर से जांच किए गए हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामलों की सुनवाई करते हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने वाले जितेंद्र प्रताप सिंह को अक्टूबर 2024 में एडिशनल सेशन जज नियुक्त किया गया था.
जटिल भ्रष्टाचार मामलों को संभालने में उनकी विशेषज्ञता के कारण उन्हें पहचान मिली है. उन्होंने चुनाव के दौरान दिए गए साम्प्रदायिक बयानों से जुड़े मामलों में भी याचिकाएं खारिज की हैं, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का मामला शामिल है.
खारिज कर दी थी कपिल मिश्रा की याचिका
7 मार्च 2025 को उन्होंने कपिल मिश्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें 2020 के एक मामले में उन्हें तलब करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी. यह मामला 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले किए गए ट्वीट्स से जुड़ा था, जिनमें शाहीन बाग इलाके को 'मिनी पाकिस्तान' बताया गया था और चुनाव को 'भारत बनाम पाकिस्तान' की लड़ाई कहा गया था.
अमानतुल्लाह खान की रिहाई का आदेश
14 नवंबर 2024 को जज जितेंद्र प्रताप सिंह ने अमानतुल्लाह खान को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिहा करने का आदेश भी दिया था. यह मामला दिल्ली वक्फ बोर्ड में उनके अध्यक्ष रहते भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था.
आबकारी नीति मामले में जज जितेंद्र प्रताप सिंह की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला स्थापित करने में विफल रहा और ठोस सबूतों के बजाय अनुमानों पर निर्भर रहा. इस फैसले पर बहस शुरू हो गई है और सीबीआई ने इसे दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है.
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