JNU के प्रोफेसर ने कहा- कैंपस के दलित और मुस्लिम टीचर्स हैं देशद्रोही

प्रोफेसर द्वारा दलित और मुस्लिम टीचरों पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जेएनयू के वाइस चांसलर और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है.

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स्‍वपनल सोनल

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2016,
  • अपडेटेड 8:07 PM IST

बीते कुछ समय से विवादों में चल रहे जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने कथित तौर पर दलित और मुस्लिम शि‍क्षकों को 'देशद्रोही' करार दिया है. एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में प्रोफेसर का यह विवादास्पद टिप्पणी की है. जबकि कैंपस में 9 फरवरी को देश विरोधी नारेबाजी का मामला अभी कोर्ट में है.

अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के मुताबिक, प्रोफेसर द्वारा दलित और मुस्लिम टीचरों पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जेएनयू के और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है. उन्हें पांच दिनों के अंदर पूरे मामले की रिपोर्ट जमा कराने को कहा गयाय है. अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन पीएल पूनिया ने इस बाबत कहा, 'हमारा मानना है कि यह मामला गंभीर है और इस पर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए. अब पुलिस हमें इस मामले में अपनी जांच के बारे में बताएगी.'

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'लोगों के अपने पूर्वाग्रह हैं'
वेबसाइट की ओर से लिए गए इंटरव्यू में पूछा गया था कि जेएनयू में कितने टीचर और स्टूडेंट देशद्रोही हैं? इसके जवाब में प्रोफेसर ने कथित तौर पर जवाब दिया, 'ऐसे शि‍क्षक 10 के करीब होंगे, लेकिन वह ऐसा जताने की कोशिश करते हैं, जैसे हर कोई उनके साथ हो. क्या आप सोच सकते हैं कि जेएनयू जैसे संस्थान में कोई बड़ा मूर्ख ही होगा, जो देशद्रोह के नारे लगाए जाने का समर्थन करेगा. ऐसे सिर्फ पांच से छह लोग हैं, यह दलित और मुस्लिम हैं. इन लोगों के अपने पूर्वाग्रह हैं.'

'बिजनौर है IS और देशद्रोही तत्वों का गढ़'
वेबसाइट ने इस इंटरव्यू का ऑडियो भी अपलोड किया है. पर बात करते हुए प्रोफेसर ने कन्हैया कुमार और उमर खालिद की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर भी बात की. उन्होंने कहा कि बिजनौर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और देशद्रोही तत्वों का गढ़ है. प्रोफेसर ने कहा कि कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारे लगाए जाने के मामले में हिरासत में लिए गए छात्रों में से एक का विश्वास 'मजबूत कश्मीरियत' में है.

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'बिगड़ सकता है कैंपस का महौल'
दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रोफेसर अपने विवादित बयान पर कायम रहते हैं तो इससे यूनिवर्सिटी में माहौल बिगड़ सकता है. पूनिया ने कहा कि आयोग को इस मामले में दो शिकायतें मिली हैं. इन आरोपों को लेकर दिल्ली पुलिस की जांच के बाद ही कुछ तय हो सकेगा.

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