नोटबंदी की वजह से देश छोड़कर जा रहे हैं विदेशी टूरिस्ट

42 वर्षीय नताली उक्रेन की रहने वाली हैं और हिमालय से लेकर गोवा तक के समुद्रतट घूमने का मन बनाकर आई थी. लेकिन नोटबंदी के दौर में हालात कुछ ऐसे बिगड़े की जेब में बचे कुल जमा 600 रुपये. अब 600 रुपये में वह क्या तो खाए और क्या घूमे.

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विदेशी भी कर रहे हैं आलोचना विदेशी भी कर रहे हैं आलोचना

अभि‍षेक आनंद / विवेक शुक्ला

  • नई दिल्ली,
  • 20 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 7:48 AM IST

नोटबंदी की वजह से विदेशों से भारत घूमने आए पर्यटकों को भी खासी दिक्कत हो रही है. 500 और 1000 के नोट चल नहीं रहे और दूसरी तरफ एक्सचेंज की तय सीमा ने फॉरेन टूरिस्ट्स को बेहाल कर रखा है.

42 वर्षीय नताली उक्रेन की रहने वाली हैं और हिमालय से लेकर गोवा तक के समुद्रतट घूमने का मन बनाकर आई थी. लेकिन नोटबंदी के दौर में हालात कुछ ऐसे बिगड़े की जेब में बचे कुल जमा 600 रुपये. अब 600 रुपये में वह क्या तो खाए और क्या घूमे.

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विदेशी भी कर रहे हैं आलोचना
नताली के साथ आए ग्रुप के बाकी टूरिस्ट्स का भी यही हाल है. ज्यादातर के पास पैसे खत्म हो चुके हैं और वो एक्स्चेंज सीमा जितने पैसे निकालकर ही काम चला रहे हैं. कुछ तो इतने परेशान लगे कि भारत सरकार के इस कदम की जमकर आलोचना करते नजर आए. उन्होंने कहा कि आप अपने देश के साथ चाहे जो करें लेकिन ऐसा कदम उठाने से पहले आपको उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो आपके देश विदेशी मुद्रा लेकर घूमने आ रहे हैं. आपका घर और परिवार यहां है लेकिन उनका क्या?

हालांकि, नोटबंदी के सख्त महौल में कुछ दुकानदार ऐसे भी हैं जो विदेशी होने के बावजूद पर्यटकों को उधार देकर उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. हिंदुस्तान का होटलगंज माना जाने वाला पहाड़गंज में बिजनेस 75 से 80 फीसदी डाउन हो चुका है. पहाड़गंज होटल महासंघ के अध्यक्ष अरूण गोयल कहते हैं कि अब होटल में बैठे-बैठे मक्खियां मारने के अलावा कोई काम नहीं बचा है. जो यहां बैठे टूरिस्ट थे वे भी हिंदुस्तान छोड़कर नेपाल-श्रीलंका जैसी जगहों पर उठकर जा रहे हैं.

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