₹128 करोड़ के नकली GST इनवॉइस रैकेट का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 6 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 128 करोड़ रुपये के फर्जी GST इनवॉइसिंग रैकेट का पर्दाफाश कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरोह शेल कंपनियां बनाकर बिना कारोबार के फर्जी बिल और ITC क्लेम करता था. छापेमारी में 51.12 लाख नकद, मोबाइल, लैपटॉप और जाली दस्तावेज बरामद हुए. मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.

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51 लाख कैश, लैपटॉप-मोबाइल बरामद.(Photo: Representational) 51 लाख कैश, लैपटॉप-मोबाइल बरामद.(Photo: Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:23 PM IST

दिल्ली में जीएसटी फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 128 करोड़ रुपये के कथित फर्जी इनवॉइसिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शेल कंपनियों और फर्जी जीएसटी इनवॉइस के जरिए बिना किसी वास्तविक कारोबार के गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल किया.

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पुलिस ने बताया कि 15 मई को दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर राज कुमार दीक्षित, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को गिरफ्तार किया गया. यह कार्रवाई जीएसटी धोखाधड़ी के एक मामले में दर्ज एफआईआर के बाद की गई.

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दरअसल, यह मामला 24 मार्च को आर्थिक अपराध शाखा थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें फर्जी फर्म एम/एस आरके एंटरप्राइजेज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नौकरी दिलाने के बहाने उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग किया गया.

नौकरी के नाम पर दस्तावेजों का दुरुपयोग

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जांच में सामने आया कि सितंबर 2025 में शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना फर्जी कंपनी बनाई गई और इसके जरिए 128 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन किए गए. पुलिस के अनुसार, इस फर्जी कंपनी के माध्यम से करीब 10 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया.

तकनीकी निगरानी, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, ईमेल आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से पुलिस को इस पूरे नेटवर्क की जानकारी मिली. जांच में यह भी सामने आया कि राज कुमार दीक्षित और फरार दिलीप कुमार इस रैकेट के मुख्य साजिशकर्ता हैं.

पुलिस के मुताबिक, दीक्षित अपने भाइयों और साथियों के साथ दरियागंज से बड़े पैमाने पर फर्जी इनवॉइसिंग सिंडिकेट चला रहा था और उसने जाली दस्तावेजों के जरिए करीब 250 शेल कंपनियां तैयार करवाईं.

शेल कंपनियों का बड़ा नेटवर्क

पुलिस जांच में पाया गया कि इन शेल कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी बिलिंग, नकली जीएसटी लेनदेन और गलत आईटीसी क्लेम के लिए किया जाता था. आरोपियों ने कई बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और बिचौलियों के जरिए वित्तीय लेनदेन का ट्रेल छिपाने की कोशिश की.

जांच के दौरान यह भी पता चला कि अमर कुमार और विभाष कुमार मित्रा शेल कंपनियां बनाने और फर्जी जीएसटी गतिविधियों को अंजाम देने में मदद करते थे. वहीं, नितिन वर्मा अकाउंटेंट्स की मदद से कई फर्जी कंपनियां संचालित करता था.

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मोहम्मद वसीम और आबिद बैंक खाते और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी उपलब्ध कराकर फर्जी लेनदेन को अंजाम देने में शामिल थे. अब तक करीब 50 शेल कंपनियों की पहचान की जा चुकी है, जिनका उपयोग पैसे घुमाने और फर्जी जीएसटी एंट्री के लिए किया गया.

छापेमारी में बड़ी बरामदगी

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से 51.12 लाख रुपये नकद, 15 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, कई सिम कार्ड, फर्जी मुहरें, जाली दस्तावेज, बड़ी मात्रा में नकली इनवॉइस और दो कारें बरामद कीं.

पुलिस के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी जीएसटी रिटर्न दाखिल करने, नकली बिल बनाने, बैंकिंग चैनलों के जरिए फंड ट्रांसफर करने और नकद लेनदेन के बदले फर्जी एंट्री देने के लिए किया जाता था.

पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लाभार्थियों और कंपनियों की पहचान करने में जुटी है और जांच अभी जारी है.

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