'48 घंटे में जवाब दें', दिल्ली विधानसभा वीडियो मामले में पंजाब DGP और जालंधर पुलिस कमिश्नर को नोटिस

दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के कथित डॉक्टर्ड वीडियो के आधार पर जालंधर में दर्ज एफआईआर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विधानसभा सचिवालय ने इस मामले में पंजाब के डीजीपी, जालंधर के पुलिस आयुक्त और साइबर सेल के स्पेशल डीजीपी को नोटिस भेजकर 48 घंटे में जवाब मांगा है.

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स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह वीडियो विधानसभा की आधिकारिक संपत्ति है. (File Photo: ITG) स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह वीडियो विधानसभा की आधिकारिक संपत्ति है. (File Photo: ITG)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:18 PM IST

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने विधानसभा की कार्यवाही से जुड़े कथित 'डॉक्टर्ड वीडियो' के आधार पर जालंधर में दर्ज एफआईआर को लेकर पंजाब के डीजीपी, जालंधर के पुलिस आयुक्त और पंजाब पुलिस के स्पेशल डीजीपी (साइबर सेल) को नोटिस जारी किया है. सभी अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर लिखित जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.

दिल्ली विधानसभा परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह मामला विधानसभा के विशेषाधिकार, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है और इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. 

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'विधानसभा की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग सदन की संपत्ति' 

स्पीकर ने स्पष्ट किया कि जिस वीडियो के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है, वह किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की निजी रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि दिल्ली विधानसभा की आधिकारिक रिकॉर्डिंग है, जो पूरी तरह सदन की संपत्ति है. उन्होंने सवाल उठाया कि किस आधार पर इस वीडियो के जरिए किसी मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.

पंजाब पुलिस की भूमिका पर सवाल

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पूरे प्रकरण में जालंधर के पुलिस आयुक्त की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होती है और यह विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का स्पष्ट मामला बनता है. उन्होंने कहा कि सदन इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा. स्पीकर ने बताया कि विपक्ष की मांग पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वीडियो क्लिप को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है और मामला विशेषाधिकार समिति को भी संदर्भित किया गया है. उन्होंने कहा कि विधानसभा की आधिकारिक रिकॉर्डिंग को 'छेड़छाड़' या 'डॉक्टर्ड' बताना सदन की गरिमा पर सीधा हमला है.

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'संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश'

स्पीकर ने आरोप लगाया कि यह केवल एक झूठा आरोप नहीं, बल्कि विधानसभा की प्रतिष्ठा और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश प्रतीत होती है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस साजिश में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल किसी भी व्यक्ति को सदन की ओर से कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बार-बार बुलाए जाने के बावजूद सदन में उपस्थित नहीं हुईं और प्रदूषण पर चल रही चर्चा में भाग नहीं लिया. चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट भी किया. उन्होंने कहा, 'नेता प्रतिपक्ष से केवल एक संक्षिप्त माफी मांगी गई थी. अगर वह दे दी जातीं, तो मामला वहीं समाप्त हो जाता, लेकिन उन्होंने माफी देने से इनकार कर दिया.'

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