दिल्ली में दिल्ली जल बोर्ड सीईओ के आवास का मामला विवादित हो गया है. दरअसल, दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग के नोटिस के बाद मामला चर्चा में आया है. कहा गया है कि एक ऐतिहासिक इमारत को गिराकर दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ का सरकारी बंगला बना.
बता दें कि निर्माण के वक्त दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ उदित प्रकाश (आईएएस) थे. वर्तमान में उनकी तैनाती मिजोरम में है. सतर्कता विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है. अधिकारी को दो सप्ताह में नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है. आरोप है कि नियमों के खिलाफ जाकर जल बोर्ड का सीईओ रहते सरकारी बंगला बनाने की मंजूरी दी गई.
इमारत को संरक्षित रखने के लिए कहा गया था
बताते चलें कि दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग ने 11 दिसंबर 2020 में महल ऑफ पठान को ऐतिहासिक इमारत के रूप में संरक्षित करने के लिए चिह्नित किया था. जमीन के उस हिस्से को 19 जनवरी 2021 को जल बोर्ड को पत्र लिखकर देने के लिए भी कहा. आरोप है कि जल बोर्ड के सीईओ रहते हुए आईएएस उदित प्रकाश ने बंगला बनाने की मंजूरी दी.
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आईएएस का मिजोरम हो गया है ट्रांसफर
बंगले में आईएएस का परिवार रहता है. जबकि उनका स्थानांतरण मिजोरम हो चुका है. पुरातत्व विभाग, जल बोर्ड और सतर्कता विभाग ने 9 जनवरी 2023 को उसका दौरा किया था. पुरातत्व विभाग का मानना है कि महल ऑफ पठान की दो संरचनाएं थी, जिसमें से एक को तोड़ दिया गया.
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राम किंकर सिंह