UCC पर बीजेपी को एक और झटका, शिरोमणि अकाली दल का विरोध, सिखों के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड की मांग

अगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी पुराने सहयोगियों पर साधने में लगी है तो यूसीसी का अकालियों का विरोध एक रोड़े की तरह ही है. अकाली दल की दिल्ली यूनिट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का न केवल विरोध किया है, बल्कि भविष्य के किसी भी सहयोग से पहले बीजेपी को यूसीसी को आइना दिखाने की बात कही है.

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शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली स्टेट चीफ परमजीत सिंह सरना ने किया विरोध शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली स्टेट चीफ परमजीत सिंह सरना ने किया विरोध

राम किंकर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 12:51 AM IST

केंद्र में बीजेपी की सहयोगी रही अकाली दल की दिल्ली यूनिट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का न केवल विरोध किया है, बल्कि भविष्य के किसी भी सहयोग से पहले बीजेपी को यूसीसी को आइना दिखाने की बात कही है. अकाली दल ने सिखों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर दिल्ली में बड़ा सम्मेलन का ऐलान किया है. ये बीजेपी के लिए एक झटके की तरह है. 

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कारण, पंजाब में बीजेपी की सबसे खास सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ही रही है. केंद्र में मंत्री रहते हुए हरसिमरत कौर केंद्र से अलग होने का फैसला लिया, इसके पीछे किसान आंदोलन था. अब जब अगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी पुराने सहयोगियों पर साधने में लगी है तो यूसीसी का अकालियों का विरोध एक रोड़े की तरह ही है.

अब यूसीसी के सिखों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर सिख संगठन दिल्ली की शिरोमणि अकाली दल के बैनर तले जुटे और यूसीसी का विरोध करते हुए देश को बांटने की कोशिश तक बता दिया. कड़े शब्दों में खिलाफत करते हुए पहले प्रस्ताव में यूसीसी को खत्म करने और पंजाब सरकार के पंजाब विधानसभा में सिख गुरुद्वारा एक्ट में किए गए संशोधन को सिरे से रद्द करने का प्रस्ताव सभी ने पास किया. 

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इस दौरान शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली स्टेट चीफ परमजीत सिंह सरना ने कहा कि भविष्य के किसी भी तरह के गठबंधन की सोच से पहले बीजेपी को यूसीसी को सिरे से खारिज करना होगा. उन्होंने इसकी निंदा करते हुए कहा कि बिना कोई मसौदा सामने रखे, लॉ कमीशन द्वारा धार्मिक संस्थाओं से समान नागरिक संहिता पर सलाह कैसे मांग सकती है?

वहीं सरदार मंजीत सिंह जीके ने कहा कि देश की आजादी के 75 साल के बाद भी सिखों का पर्सनल लॉ नहीं है. श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को तुरंत सिख पर्सनल लॉ बनाने के लिए कमेटी बनानी चाहिए. तभी सिख पर्सनल लॉ को लागू करवाने का सरकार पर दबाव बनेगा. लॉ कमीशन को चिट्ठी लिखकर यूनिफॉर्म सिविल कोड में सिख इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की मांग की है.

सिखों में इन सवालों को लेकर संशय की स्थिति-

-संविधान में सिखों पर कहीं कहीं हिंदू पर्सनल लॉ लागू होता है. जबकि सिखों की दियां दंपति की शादी आंनद मैरिज एक्ट में रजिस्टर्ड हो‌ती जाती है, अलगाव हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अंजाम दिया जाता है. सिखों के संस्कार परंपराएँ अन्य धर्मों से अलग हैं.

-कृपाण रखने को लेकर संशय.

-निहंग और हथियार के प्रदर्शन पर संशय.

-सिखों से जुड़ी संस्थाओं की अथॉरिटी पर कोई आंच ना आए.

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-किसी भी तरह के फैमिली प्लैनिंग पॉलिसी को ना थोपा जाए.

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