केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में 'हल्ला बोल-दरवाजा खोल' नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर था. इस अवसर पर कई रिटार्यड जज वकील और अन्य प्रबुद्ध लोग उपस्थित रहे. पटना में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने न्याय व्यवस्था पर जमकर सवाल उठाए.
केन्द्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, 'जजों की योग्यता का सवाल हम नहीं उठा रहे हैं. लेकिन क्या जो लोग उस कुर्सी पर बैठे हैं सिर्फ वही लोग योग्य हैं. क्या दूसरे लोग जो बाहर हैं वो योग्य नहीं है? दूसरे लोग उनसे भी ज्यादा योग्य हैं लेकिन दूसरे लोग वहां जाए कैसे? सवाल इस बात का है कि आज जो सिस्टम और व्यवस्था है वह व्यवस्था योग्य विद्यार्थियों के लिए बहुत बड़ी बाधा है. कुछ लोग कहते हैं कि आरक्षण के कारण मेरिट प्रभावित हो रही है लेकिन मेरा कहना है सिस्टम के कारण ही मेरिट प्रभावित हो रही है.'
उन्होंने कहा कि समुद्र किनारे मछली मारकर परिवार चलाने वाले के घर से एक मेरिट वाला विद्यार्थी निकलता है और देश का राष्ट्रपति बन जाता है. ऐसे एक नहीं अनेक उदाहरण मिलेंगे. बर्तन साफकर अपने बेटा-बेटी को लोग आईएएस और आईपीएस बना देते हैं. लेकिन भी ऐसा उदाहरण बताएं कि बर्तन साफ करने वाली का बेटा सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट का जज बन गया हो.
कुशवाहा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जज बनने का अवसर सब को नहीं मिल पाता है. इसलिए ये गैर प्रजातांत्रिक व्यवस्था है. प्रजातांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की चीजों को इजाजत नहीं दी जा सकती. एक तरह से कहा जाए तो हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था पर यह सिस्टम एक काला धब्बा है. इस काले धब्बे को मिटाने के लिए जहर भी पीना पड़े तो हम लोगों को ऐतराज नहीं. इसीलिए हम लोगों अभियान का नाम 'हल्ला बोल दरवाजा खोल' रखा है. हमें समर्थन चाहिए.'
सुजीत झा / मोनिका गुप्ता