लालू प्रसाद यादव आज लंबे समय बाद RJD कार्यकर्ताओं को करेंगे संबोधित, पार्टी के 25 साल हुए पूरे

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के स्थापना के 25 साल पूरे होने के अवसर पर पटना में पार्टी ने कार्यक्रम का ऐलान किया है. इस अवसर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सोमवार को संबोधित करेंगे.

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लालू प्रसाद यादव लालू प्रसाद यादव

उत्कर्ष कुमार सिंह

  • पटना,
  • 04 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 12:31 AM IST
  • आरजेडी मना रही 25वां स्थापना दिवस
  • लालू प्रसाद यादव करेंगे संबोधित
  • सुशील मोदी बोले- कोई फर्क नहीं पड़ता

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के स्थापना के 25 साल पूरे होने के अवसर पर पटना में पार्टी ने कार्यक्रम का ऐलान किया है. इस अवसर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सोमवार को कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कहा कि कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए पांच जुलाई को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे के बीच स्थापना दिवस समारोह आयोजित जाएगा. वहीं, सुशील मोदी ने लालू यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि बिहार की राजनीति में अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. 

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समारोह का उद्घाटन वर्चुअल रूप से आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद करेंगे. तीन वर्षों के इंतजार के बाद बिहार के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को लालू प्रसाद यादव के विचार सुनने का अवसर मिलेगा. तेजस्वी यादव ने लालू प्रसाद यादव को जन-जन का नेता बताते हुए कहा कि वे देशवासियों के दिल में वास करते हैं. वे गरीब, पीड़ित और वंचितों की आवाज हैं. उन्होंने कहा, ''इन वर्गों के अधिकार की रक्षा के लिए उनका जीवन समर्पित है. आप सभी लोग उनके विचारों को समझें और समाज के सभी वर्ग, तबके के उत्थान के लिए संघर्ष करें. आपकी सरकार बनेगी तब सबको सम्मान और अधिकार मिलेगा.''

तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव ने आरजेडी को ए-टू-जेड पार्टी बताते हुए कहा कि कार्यकर्ता पूरे मन से पार्टी को जन-जन तक पहुंचाने में लग जाएं. पार्टी को माजबूत करें और कार्यकर्ता अपने कार्य क्षेत्र में काम करें. अपनी और पार्टी की पहचान को जनता के बीच स्थापित करें.

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वहीं, बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सुशील मोदी ने हमला बोलते हुए कहा कि लालू प्रसाद अब जेल में रहें या जमानत पर, पार्टी के पोस्टर-बैनर से गायब किए जाएं या उनकी सचित्र वापसी हो, बिहार की राजनीति पर इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. यह दिल बहलाने के लिए एक राजनीतिक दल की आंतरिक कसरत-भर है.

 

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