नेपाल में मूसलाधार बारिश से बिहार बेहाल! कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने ने कई गांव जलमग्न

बिहार के सहरसा जिले के कई गांव कोसी नदी के पानी में डूबे हुए हैं. दरअसल, नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश और कोसी बांध से छोड़े गए पानी के चलते सहरसा जिले के गांव टापू में तबदील हो गए हैं.

Advertisement
Flood like Situation in Bihar saharsa Flood like Situation in Bihar saharsa

रोहित कुमार सिंह

  • सहरसा,
  • 17 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 3:21 PM IST

नेपाल में हो रही लगातार बारिश का असर बिहार के सहरसा जिले में दिखाई दे रहा है. नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश और कोसी बराज से दो दिन पहले 4.5 लाख क्यूसेक से भी ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है. नदी का जलस्तर बढ़ने से तटबंध के अंदर बसे दर्जनों गांव या तो जलमग्न हो चुके हैं या फिर टापू में तब्दील हो गए हैं. कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण तटबंध के अंदर बसे गांवों में लोगों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है इसका जायजा लेने के लिए आजतक की टीम बुधवार को सहरसा के बरियाही गांव पहुंची.

Advertisement

कोसी के पानी में डूबा गांव का कुछ हिस्सा
आजतक की टीम सबसे पहले सहरसा जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर नौहट्टा प्रखंड पहुंची जहां पर बने तटबंध से नाव के जरिए कोसी नदी के अंदर तकरीबन 6 किलोमीटर सफर करने के बाद बरियाही गांव पहुंची. इस गांव का कुछ हिस्सा पानी में जलमग्न हो चुका है और बाकी हिस्सा टापू में तब्दील हो चुका है. बरियाह  गांव के चारों तरफ केवल कोसी नदी का पानी फैला हुआ है, जिससे कि वहां पर रहने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

Flood like situation

स्थानीय लोगों का कहना है कि 3 दिन पहले कोसी बराज से पानी छोड़े जाने के बाद उनके गांव के आसपास नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया और फिर कुछ ही वक्त में पूरा गांव टापू बन गया. गांव में रहने वाले लोगों के पास अब आने-जाने के लिए नाव के अलावा कोई दूसरा साधन नहीं बचा है. हाटी गांव के मुखिया दीवाना सिंह का कहना है कि 3 दिन पहले से गांव में पानी भरना शुरू हो गया था. कोसी का जलस्तर बढ़ने के कारण गांव टापू में तब्दील हो गया है और लोगों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. 

Advertisement

कोसी तटबंध के अंदर जलस्तर बढ़ने के साथ ही गांव के टापू में तब्दील होने पर सहरसा प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वह अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर आ जाएं लेकिन लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर आने के लिए राजी नहीं है. उनका मानना है कि वह अपने परिवार, मवेशी और सामान को छोड़कर किसी भी कीमत पर सुरक्षित स्थानों पर नहीं जाएंगे.

गांव के रहने वाले अशोक कुमार का कहना है कि हम लोग अपने घर-द्वार को छोड़कर कैसे चले जाएं. प्रशासन से हम लोगों को कोई मदद नहीं मिली है. हम लोगों के पास कहीं जाने के लिए केवल नाम का सहारा है. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement