Bihar: 4 साल से बच्ची के सीने में फंसा हुआ था सिक्का, अचानक तबीयत बिगड़ी और फिर...

बिहार के बेतिया में एक बच्ची ने खेल-खेल में चार साल पहले 2 रुपये का सिक्का निगल लिया था जो उसके सीने में फंसा हुआ था. सीने में सिक्का होने की वजह से अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई जिसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके उसे बाहर निकाला.

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चार साल से बच्ची के सीने में फंसा हुआ था सिक्का चार साल से बच्ची के सीने में फंसा हुआ था सिक्का

aajtak.in

  • बेतिया,
  • 30 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST
  • बच्ची के सीने में चार साल से फंसा था 2 रुपये का सिक्का
  • बच्ची ने खेल-खेल में निगल लिया था

बिहार के बेतिया में सालों पहले एक बच्ची ने खेल-खेल में सिक्का निगल लिया था. उस वक्त तो उसे कुछ नहीं हुआ, लेकिन घटना के चार साल बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और डॉक्टर से जांच करवाने पर पता चला कि बच्ची के सीने में सिक्का फंस हुआ है जिस वजह से उसकी हालत खराब हो गई. ऑपरेशन के बाद बच्ची के सीने से सिक्के को बाहर निकालकर उसकी जान बचाई गई.

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दरअसल, नरकटियागंज के नोनिया टोली गांव में रहने वाली एक 8 साल की बच्ची सुषमा ने खेल-खेल में गलती से सिक्का निगल लिया था जो कि उसके सीने में जाकर फंस गया था. हालांकि, बच्ची को उस वक्त कुछ नहीं हुआ.

परिजनों को लगा कि शौच के रास्ते सिक्का निकल गया होगा, लेकिन मासूम के बीमार होने पर परिजनों ने जब उसे डॉक्टर को दिखाया तो बीमारी को समझने के लिए बच्ची का एक्स-रे कराया गया. 

एक्स-रे में सामने आया कि बच्ची के सीने में सिक्का अभी भी फंसा हुआ है. इसके बाद डॉक्टर ने पीड़ित बच्ची की जिंदगी को बचाने के लिए ऑपरेशन को जरूरी बताया.

हालांकि, परिजनों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वो बच्ची के इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे. बाद में परिजनों ने 17 हजार रुपये कर्ज लेकर अपनी बेटी का ऑपरेशन कराया, जिसमें डॉक्टरों ने मासूम के सीने में फंसे हुए सिक्के को बाहर निकाल दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची के सीने में 2 रुपये का सिक्का फंसा था.

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इसको लेकर उस बच्ची के पिता राजकुमार साह ने बताया, लड़की के सीने में चार साल पहले सिक्का फंस गया था, जब हमलोग डॉक्टर से मिले तो एक्सरे में सिक्का फंसे होने की बात सामने आई, बेतिया लाकर उसका ऑपरेशन कराया तब जाकर सिक्के को बाहर निकाला गया. इस ऑपरेशन में करीब 17 हजार रुपए खर्च हुए जिसके लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा. (इनपुट - रामनेंद्र गौतम)

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