World TB Day 2026: भारत में दुनिया से दोगुनी रफ्तार से कम हुए टीबी के केस, जानिए TB के संकेत और इलाज

वर्ल्ड टीबी डे पर भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश में टीबी के मामलों में 21% की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी है। जानिए टीबी क्या है, इसके लक्षण, कारण और इलाज के आसान तरीके।

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खांसी के साथ ही अगर आपके शरीर में हल्का बुखार लगातार बना रहे तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए. (Photo: ITG) खांसी के साथ ही अगर आपके शरीर में हल्का बुखार लगातार बना रहे तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए. (Photo: ITG)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:36 AM IST

World TB Day 2026: थिएटर में फिल्म शुरू होने से पहले आपने एक विज्ञापन कभी ना कभी जरूर देखा होगा, जिसमें अंधेरे कमरे में एक आदमी लगातार आती खांसने से परेशान होता दिखता है और जैसे ही वो रुमाल देखता है तो उसपर खून के सुर्ख लाल धब्बे होते हैं. ये विज्ञापन देख भारतीय दर्शकों को एक ऐसी बीमारी के बारे में जागरुक किया जाता था, जिसे कभी लाइलाज माना जाता है. ये बीमारी एक ऐसा खामोश दुश्मन है, जो फेफड़ों के रास्ते शरीर में एंट्री करता है और धीरे-धीरे इंसान को अंदर से खोखला कर देता है. ये बीमारी ट्यूबरक्लोसिस (TB) थी.

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लेकिन रुकिए! कहानी में थोड़ा ट्विस्ट है. किसी जमाने में जिस ट्यूबरक्लोसिस से भारत में रहते लोग डरा करते हैं, लेकिन अब इस लाइलाज बीमारी को इलाज से ठीक किया जा सकता है. टीबी भारतीय के सामने घुटने टेक रही है. आज 24 मार्च 2026 को पूरी दुनिया वर्ल्ड टीबी डे मना रही है. इस खास मौके पर आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ये बीमारी होती क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है.

भारत में क्या है टीबी का हाल?
टीबी के खिलाफ लड़ाई में भारत साल दर साल बड़ी कामयाबी हासिल कर रहा है. साल 2015 में जहां प्रति लाख 237 केस सामने आते थे, वहीं 2024 में ये घटकर 187 रह गए, यानी करीब 21% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. खास बात ये है कि ये गिरावट वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है, जिससे भारत ने दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण पेश किया है.

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टीवी के सिर्फ मामलों में ही कमी ही नहीं आई है, बल्कि इलाज के मोर्चे पर भी देश ने बड़ी छलांग लगाई है. अब टीबी के ट्रीटमेंट की कवरेज बढ़कर 92% तक पहुंच गई है. साल 2024 में ही 26.18 लाख मरीजों ने इलाज शुरू कर इस बीमारी को चुनौती दी है. ये सभी आंकड़े भारत सरकार की PIB प्रेस रिलीज (12 नवंबर 2025) से लिए गए हैं.

आखिर क्या होती है टीबी?
टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) एक इंफेक्शियस बीमारी है (एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाली), जो माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नाम के बैक्टीरिया के कारण होती है. ये बीमारी सबसे ज्यादा फेफड़ों (लंग्स) पर असर डालती है, इसलिए इसे अक्सर फेफड़ों की बीमारी के रूप में जाना जाता है. हालांकि, कई मामलों में ये केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों जैसे रीढ़, दिमाग और किडनी तक भी फैल सकती है. इसलिए समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है, ताकि ये गंभीर रूप न ले सके.

टीबी के लक्षण क्या हैं?
अब सवाल ये उठता है कि आखिर टीबी के लक्षण क्या होते हैं. अगर आपको ये लक्षण दिखाई दें, तो सतर्क हो जाएं:

  • 2 हफ्तों से ज्यादा समय तक लगातार खांसी
  • सीने में दर्द या भारीपन
  • खांसी के साथ खून या बलगम आना
  • लगातार कमजोरी और थकान महसूस होना
  • बिना वजह तेजी से वजन कम होना
  • हल्का बुखार और रात में ज्यादा पसीना आना

हालांकि, कुछ लोगों में टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं. इस स्थिति को लेटेंट टीबी (Latent TB) कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति संक्रमित तो होता है, लेकिन उसे ये बीमारी महसूस नहीं होती है.

टीबी की जांच कैसे होती है?
टीबी की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई तरह के टेस्ट करवाते हैं:

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स्किन या ब्लड टेस्ट: स्किन और ब्लड टेस्ट से ये पता लगाया जाता है कि शरीर में टीबी के बैक्टीरिया मौजूद हैं या नहीं.
बलगम का टेस्ट: इसमें मरीज के बलगम की जांच की जाती है, जिससे टीबी के जीवाणु की पहचान होती है. ये टीबी की पुष्टि के लिए सबसे अहम टेस्ट माना जाता है.
चेस्ट एक्स-रे या सीटी स्कैन: इन दोनों टेस्टिंग के जरिए फेफड़ों की स्थिति देखी जाती है और ये पता चलता है कि संक्रमण कितना फैला हुआ है.

टीबी का इलाज कैसे होता है?
टीबी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है. बस जरूरी है कि मरीज अपना इलाज पूरा और सही तरीके से करें. इससे निजात पाने के लिए आपको 6 से 9 महीने तक नियमित दवाइयां लेनी पड़ती हैं. इलाज में एक साथ कई एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. 

लेकिन ध्यान रखें की इन दवाओं का कोर्स पूरा करना पड़ता है. टीबी की दवा को बीच में छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे बीमारी दोबारा लौट सकती है और दवाइयों का असर भी कम हो सकता है.

किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है या जो डायबिटीज और किडनी से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें टीबी का खतरा ज्यादा रहता है. इसके अलावा भीड़भाड़ वाली जगहों में रहने वाले लोग और टीबी मरीज के संपर्क में आने वाले व्यक्ति भी ज्यादा खतरे में होते हैं.  

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