वैज्ञानिकों ने खोजा मोटापा घटाने का नया तरीका, बिना एक्सरसाइज ऐसे होगा वेट लॉस

वैज्ञानिकों ने शरीर में मौजूद ब्राउन और बेज फैट की भूमिका पर नई रिसर्च की है जिसमें पाया गया है कि ये फैट सेल्स कैलोरी जलाकर गर्मी पैदा करते हैं, जिससे वजन कम हो सकता है. ये बेज फैट क्या है और कैसे वजन कम करता है, इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

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अब शरीर की चर्बी खुद ही मोटापा कम कर सकती है. (Photo: ITG) अब शरीर की चर्बी खुद ही मोटापा कम कर सकती है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:17 PM IST

मोटापा कम करने को लेकर हर कोई अलग-अलग तरीके अपना रहा है. कुछ लोग अपनी डाइट पर ध्यान देते हैं तो कुछ लोग फिजिकल एक्टिविटी बढ़ा देते हैं. लेकिन कई लोग ऐसा करना मुश्किल समझते थे तो वे वेट लॉस दवाइयों का भी सहारा ले रहे थे. हाल ही में वैज्ञानिकों के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है और उन्होंने वजन कम कने का नया तरीका खोजा है. नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि हमारे शरीर की फैट सेल्स सिर्फ एनर्जी स्टोर नहीं करतीं बल्कि वे खुद को जलाकर गर्मी पैदा करती हैं और उससे वजन कम हो सकता है.

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सफेद और भूरे फैट का कमाल

रिसर्च के मुताबिक, हमारे शरीर में मुख्य रूप से 2 तरह का फैट होता है, सफेद (White Fat) और ब्राउन (Brown Fat). सफेद फैट वह है जो पेट और जांघों पर जमा होता है और जिसे कम करने के लिए लोग मेहनत करते हैं. वहीं, ब्राउन फैट एक 'बायोलॉजिकल हीटर' की तरह काम करता है.

इसका काम कैलोरी जमा करना नहीं बल्कि कैलोरी जलाकर गर्मी पैदा करना है. इसमें 'माइटोकॉन्ड्रिया' नाम के छोटे-छोटे पावरहाउस बहुत ज्यादा होते हैं, जिनमें आयरन होने की वजह से इसका रंग भूरा दिखता है.

आसान शब्दों में समझें तो ब्राउन फैट का मुख्य काम शरीर के तापमान को बनाए रखना है. जब हमें ठंड लगती है, तो ब्राउन फैट एक्टिव हो जाता है और शुगर (ग्लूकोज) और सफेद फैट को जलाकर ऊर्जा पैदा करता है. इस प्रक्रिया में शरीर के अंदर गर्मी पैदा होती है, जिससे कड़कड़ाती ठंड में भी शरीर का अंदरूनी तापमान सही रहता है.

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छोटो बच्चों में ब्राउन फैट अधिक होता है लेकिन बड़े लोगों में यह कम मात्रा में होता है और आमतौर पर गर्दन, कॉलर बोन के आसपास और रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से में ही पाया जाता है.

पहले माना जाता था कि ब्राउन फैट सिर्फ नवजात शिशुओं में होता है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पाया है कि वयस्कों में यदि ब्राउन फैट मौजूद होता है तो उसे वजन कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.

बेज फैट की हुई खोज

रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक नए फैट सेल्स की खोज की है जिसे 'बेज फैट' (Beige Fat) कहा जा रहा है. ये वो कोशिकाएं हैं जो सफेद फैट यानी चर्बी के बीच ही रहती हैं. 

कुछ खास परिस्थितियों जैसे ठंडे तापमान के संपर्क में आने या कुछ खास हार्मोनल बदलावों से ये सफेद फैट सेल्स बेज फैट सेल्स में बदल सकती हैं और ब्राउन फैट की तरह शरीर की कैलोरी बर्न करना शुरू कर देते हैं. 

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर हम सफेद फैट को बेज फैट में बदलने की प्रक्रिया को बढ़ा दें तो बिना किसी भारी एक्सरसाइज के भी भूरे फैट की तरह कैलोरी को गर्मी बनाकर उड़ा सकती है या बर्न कर सकती है.

हालांकि अभी भी इस पर रिसर्च जारी है लेकिन आपको वजन कम करने के लिए अभी अपनी डाइट, एक्सरसाइज, नींद और स्ट्रेस लेवल पर ध्यान देने की जरूरत है.

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