Earbuds Side Effects: क्या आप भी रोज साफ करते हैं कान? फायदे की जगह हो सकता है नुकसान, डॉक्टर ने दी चेतावनी!

Earbuds Side Effects: कई लोग शरीर के अन्य अंगों की तरह कान को भी रेगुलर साफ करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बार-बार कॉटन बड्स से कान साफ करने पर मैल बाहर निकलने के बजाय अंदर चला जाता है, जिससे कान में दबाव बढ़ता है. इससे कान का पर्दा फटने, इन्फेक्शन होने और सुनने की क्षमता कम होने का गंभीर खतरा रहता है.

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कान का मैल गंदगी नहीं सुरक्षा कवच! जानें क्यों डॉक्टर ईयरबड्स इस्तेमाल करने से मना करते हैं (Photo- Adobe Stock) कान का मैल गंदगी नहीं सुरक्षा कवच! जानें क्यों डॉक्टर ईयरबड्स इस्तेमाल करने से मना करते हैं (Photo- Adobe Stock)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

Earbuds Side Effects: ईयरवैक्स यानी कान का मैल हमारे कान से निकलने वाला एक नेचुरल रिसाव है, जिसका हमारे शरीर में महत्वपूर्ण काम है. लेकिन कई लोग जिस तरह स्किनकेयर, बाल धोने या नाखून काटने का काम करते हैं, वैसे ही कान का मैल भी निकालते रहते हैं. कुछ लोग इसे हफ्ते में एक बार साफ करते हैं, तो कुछ रोजाना. इसके लिए कुछ लोग कान में तेल डालते हैं, कुछ क्यू-टिप्स या नए ईयरबड्स का  इस्तेमाल करते हैं. लोगों को लगता है कि जैसे शरीर के हर अंग की सफाई जरूरी है, वैसे ही कान की भी सफाई जरूरी है.

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क्या ईयरवैक्स हानिकारक है?

ईयरवैक्स गंदगी नहीं है, बल्कि यह शरीर का नेचुरल क्लीनर है. इसका काम धूल, बैक्टीरिया और  अन्य कणों को रोकना है ताकि वे हमारे नाजुक कान के अंदर न पहुंचें. ज्यादातर मामलों में ईयरवैक्स अपने आप ही कान से बाहर निकल जाता है, जब हम चबाते हैं या बात करते हैं. इसलिए कई लोगों को अपने कानों को साफ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती.

कब ईयरवैक्स समस्या बन सकता है?

हालांकि, कभी-कभी कान में ईयरवैक्स जमा हो जाता है और इसे डॉक्टर 'इम्पैक्शन' कहते हैं. ऐसा होने पर व्यक्ति को कान में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है, कान में घंटी जैसी आवाज सुनाई दे सकती है, सुनने की क्षमता घट सकती है, चक्कर आ सकते हैं, खांसी हो सकती है या कान से बदबू भी आ सकती है. ज्यादातर मामलों में यह समस्या उन लोगों में होती है जो हियरिंग एड या इयरप्लग का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, बुजुर्ग या जिनके कान की नली का आकार ऐसा होता है कि वैक्स खुद बाहर नहीं आ पाता.

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रिसर्च क्या कहती है?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ओटोलरींगोलॉजी, हेड एंड नेक सर्जरी फाउंडेशन के अनुसार, कान में कॉटन स्वाब का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए. कान खुद ही साफ हो जाता है इसे रूटीन से साफ करने की जरूरत नहीं है. कॉटन स्वाब डालने से वैक्स अंदर जा सकता है, कान पर दबाव पड़ सकता है, सुनने की क्षमता कम हो सकता है या कान और ईयरड्रम को चोट पहुंच सकता है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग भी बताता है कि ईयरवैक्स खराब हाइजीन का संकेत नहीं है, बल्कि यह कान के लिए बेहद जरूरी है. यह कान के अंदर की त्वचा को मॉइस्चराइज करता है, धूल और गंदगी को रोकता है, डेड स्किन और अन्य कणों को अब्जॉर्ब करता है और बैक्टीरिया या अन्य जीवाणुओं को अंदर पहुंचने से रोकता है.

वहीं, अगर ईयरवैक्स ज्यादा जमा हो जाए और इसके कारण परेशानी होने लगे तो इसे 'सेरुमेनोसिस' कहा जाता है.  डॉक्टर इस स्थिति में ओवर-द-काउंटर ड्रॉप्स, हल्की पानी से धोने की तकनीक या पेशेवर हेल्थकेयर से इसे हटवाने की सलाह देते हैं.

लोग कान साफ क्यों करते हैं?

रिसर्च से पता चलता है कि लोग अक्सर अपने कान खुद साफ करते हैं. 2017 में क्वाजुलु-नताल यूनिवर्सिटी में एक स्टडी की गई, जिसमें अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट के कान खुद साफ करने की आदत और इससे होने वाले नुकसान को देखा गया. 206  लोगों में से 98% लोग अपने कान खुद साफ करते थे और 75% ने माना कि यह फायदेमंद है. कान खुद साफ करने वालों में से लगभग 79.6% कॉटन बड्स का इस्तेमाल किया था. लेकिन इससे  2.4% लोगों को चोट लगने का खतरा भी था. लेकिन, खुद से कान साफ करने से चोट लगने का जोखिम ज्यादा बढ़ सकता है. ऐसे में लोगों को इस बारे में जागरूक होने की आवश्यकता है.

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कान को साफ करने को लेकर डॉक्टर का क्या कहना है?

Aajtak.In से बातचीत में गुरुग्राम, ईएनटी, नारायण हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट डॉ. अमित शर्मा ने कहा कि कॉटन स्वैब या ईयरबड्स इस्तेमाल करना कान और ईयरड्रम के लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि क्यू-टिप्स नेचुरल सिस्टम के बिल्कुल उलटे काम करते हैं. हमारा कान खुद ही साफ हो जाता है जब हम कॉटन स्वैब या ईयरबड्स से कान साफ करने की कोशिश करते हैं तो गंदगी अंदर चला जाता है.

'अगर हम बराबर अपने कान को  कॉटन स्वैब से साफ करते हैं, तो इससे कान में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और ईयरड्रम को भी नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा, इसके ज्यादा इस्तेमाल से कान के अंदर मैल जमा हो सकता है. लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से कान के बाहरी हिस्से (एक्सटर्नल ऑडिटरी कैनाल) में सिकुड़न और कई तरह के इंफेक्शन हो सकते हैं, जिसे ओटिटिस एक्सटर्ना कहते हैं. इसलिए, कान के अंदर कॉटन स्वैब का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.'

ईयरबड्स और कॉटन स्वैब के लगातार इस्तेमाल से क्या होता है?

'ईयरबड्स और कॉटन स्वैब के लगातार इस्तेमाल करने से कान का मैल और ज्यादा अंदर चला जाता है, जिससे कान में इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है. इसके अलावा यह कान की नेचुरल लाइनिंग को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. कई बार कॉटन स्वैब कान के अंदर फंस जाता है और फिर उसे निकालने के लिए डॉक्टर को माइक्रोस्कोप की मदद लेनी पड़ती है. यहीं वजह है कि कॉटन स्वैब से कान साफ करने से बचना चाहिए.'

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ऐसे में अगर आप भी बार-बार कॉटन स्वैब या ईयरबड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ऐसा करने से बचें. इसका इस्तेमाल तभी करें जब कान के बाहर मैल दिखाई दे. बाकी समय इसका इस्तेमाल न करें.

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