किचन का 'साइलेंट किलर' है बर्तन धोने वाला लिक्विड, शरीर को अंदर से कर रहा छलनी! डॉक्टर ने बताया

अधिकांश भारतीय घरों में डिशवॉश लिक्विड का रोजाना इस्तेमाल होता है, लेकिन इसके कुछ केमिकल्स स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. ये स्किन एलर्जी, हार्मोन असंतुलन और बर्तनों पर अवशेष छोड़ सकते हैं, सुरक्षित और नेचुरल ऑप्शन चुनना और अच्छी तरह धोना जोखिम को कम करता है.

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बर्तन धोने के लिए देसी चीजें ही इस्तेमाल करें. (PHOTO: ITG) बर्तन धोने के लिए देसी चीजें ही इस्तेमाल करें. (PHOTO: ITG)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST

रसोई में बर्तन धोने के लिए डिशवॉश लिक्विड का इस्तेमाल आमतौर पर हर घर में होता ही है. हम इससे अक्सर बिना सोचे-समझे बर्तन धोते हैं. झाग बनता है, चिकनाई हटती है, और हमें लगता है कि सब कुछ साफ और सही है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस लिक्विड से आप अपने खाने के बर्तन साफ कर रहे हैं, वही आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है?

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मुंबई स्थित ऑर्थोपेडिक सर्जन, स्वास्थ्य प्रशिक्षक और न्यूट्रीबाइट वेलनेस के सह-संस्थापक डॉ. मनन वोरा ने  25 मार्च को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है. उसमें उन्होंने कहा, डिशवॉश लिक्विड को असल में रसोई का सबसे टॉक्सिक यानी जहरीला प्रोडक्ट हो सकता है. 

क्या है असली खतरा?

डॉ. मनन वोरा का कहना है कि कई फेमस डिशवॉश ब्रांड्स में आइसोथियाजोलिनोन्स (Isothiazolinones) नामक केमिकल्स होते हैं. ये सिंथेटिक बायोसाइड्स और प्रिजर्वेटिव्स हैं, जिनका इस्तेमाल बैक्टीरिया को रोकने के लिए किया जाता है. सुनने में यह अच्छा लग सकता है, लेकिन मानव शरीर पर इसके प्रभाव चिंताजनक हैं. 

वैज्ञानिकों की रिसर्च के अनुसार, ये केमिकल आपके स्वास्थ्य को तीन तरह से प्रभावित करते हैं:

स्किन की एलर्जी (कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस)

जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में पब्लिश हुई रिसर्च मिथाइलिसोथियाजोलिनोन: एक उभरता हुआ एलर्जेन के अनुसार, ये केमिकल स्किन सेंसिटाइजर की तरह काम करते हैं, यानी बार-बार संपर्क में आने पर एलर्जी, खुजली या कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. खासकर उन लोगों के लिए जिनकी त्वचा संवेदनशील है, यह खतरा और बढ़ जाता है.

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हार्मोनल इंबैलेंस (एंडोक्राइन डिसरप्शन)

यूरोपीय संघ की SCCS (साइंटिफिक कमिटी ऑन कंज्यूमर सेफ्टी) की रिपोर्ट और कई अन्य साइटोटॉक्सिसिटी स्टडीज में यह संकेत मिले हैं कि ये केमिकल शरीर के हार्मोनल सिस्टम में दखल दे सकते हैं. हालांकि इस पर अभी और गहन रिसर्च जारी है, लेकिन शुरुआती नतीजे इन्हें स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा बताते हैं.

अनजाने में केमिकल्स का सेवन

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि साधारण पानी से धोने पर भी कई बार बर्तनों से डिशवॉश लिक्विड पूरी तरह नहीं हटता. इसके सूक्ष्म अंश प्लेट और चम्मच पर रह जाते हैं. The Lancet जैसे मेडिकल जर्नल्स में मौजूद केस स्टडीज बताती हैं कि इन अवशेषों को निगलने से पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच सकता है, जिसे म्यूकोसल इंजरी कहते हैं.

डिशवॉश लिक्विड का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए?

ऐसे में डिशवॉश लिक्विड का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर देना कोई हल नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हम प्लांट-बेस्ड और नेचुरल इंग्रीडिएंट्स वाले डिशवॉश लिक्विड चुनें. ऐसे प्रोडक्ट्स में नेचुरल बायो-एंजाइम्स होते हैं, जो बिना नुकसान पहुंचाए चिकनाई साफ करते हैं.

इन बातों का रखें ध्यान

इसके अलावा, बर्तन धोने के बाद उन्हें अच्छी तरह पानी से धोना भी जरूरी है, ताकि किसी भी तरह का केमिकल अवशेष न रह जाए.

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छोटे-छोटे बदलाव, जैसे सही प्रोडक्ट चुनना और सही तरीके से सफाई करना, लंबे समय में बड़े फायदे दे सकते हैं.

Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है, इसे चिकित्सकीय सलाह का ऑप्शन न समझें. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या प्रोडक्ट के इस्तेमाल को लेकर फैसला लेने से पहले एक्सपर्ट से सलाह लें.

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