बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किसी ब्रिज के पिलर की तस्वीर शेयर करते हुए कुछ सोशल मीडिया यूजर्स दावा कर रहे हैं कि 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा लगाने वाली सरकार के राज में पुलों-इमारतों का हाल बेहाल है.
कई लोग तस्वीर के साथ तंज कसते हुए लिख रहे हैं कि "विकास" के घुटने मुड़ गए हैं और अब ऑपरेशन की जरूरत है. फेसबुक से लेकर एक्स तक हर जगह ये तस्वीर मराठी भाषा के कैप्शन के साथ वायरल है.
ऐसे ही दो पोस्ट्स का आर्काइव्ड वर्जन यहां और यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये फोटो भारत की नहीं बल्कि जापान की है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वायरल फोटो को रिवर्स सर्च करने से हमें जापान के 'Muroran Institute of Technology' की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च पेपर में इससे मिलती-जुलती तस्वीर मिली. ये रिसर्च 1995 में जापान के ह्योगो प्रान्त में कोबे शहर और उसके आसपास के इलाके में आए भूकंप के चलते वहां के Daikai Station Subway की इमारत के ढहने से संबंधित है.
इसमें बताया गया है कि 17 जनवरी, 1995 को आए भूकंप के दौरान Daikai Station Subway पूरी तरह ढह गया. इस शोध में एक तस्वीर है जो वायरल फोटो से काफी मिलती है. तस्वीर का क्रेडिट Keiichiro Sonoda नामक शोधकर्ता को दिया गया है.
हमें और भी कई शोध पत्रों में ये तस्वीर मिली. यहां भी इसका क्रेडिट Keiichiro Sonoda को दिया गया है.
Keiichiro Sonoda एक जापानी प्रोफेसर और शोधकर्ता हैं. Research Map वेबसाइट के अनुसार, Keiichiro ने मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल व सीस्मिक इंजीनियरिंग और सोशल इन्फ्रासट्रक्चर में शोध किए हैं.
1995 में जापान के पश्चिमी हिस्से में आए भूकंप को यहां की सबसे भयानक त्रासदियों में गिना जाता है. हैनशिन इलाके में आए इस भूकंप में 6000 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे और तकरीबन 40 हजार लोग घायल हुए थे. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान कोबे शहर को पहुंचा था.
साफ है, जापान में भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए एक पिलर की फोटो को भारत का बताकर सरकार पर निशाना साधा जा रहा है.
(इनपुट: पथिकृत सान्याल)
फैक्ट चेक ब्यूरो