कलकत्ता हाईकोर्ट ने बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार द्वारा सख्ती से लागू किए जा रहे पशु वध नियमों पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है.
राज्य सरकार ने हाल ही में पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कुर्बानी से पहले मवेशियों की उम्र और शारीरिक स्थिति का पशु चिकित्सा मूल्यांकन अनिवार्य किया गया था.
अब इसी संदर्भ में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया है जिसमें कुछ लोग, दो मुस्लिम व्यक्तियों को बांध कर धमका रहे हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि ये लोग अवैध तरीके से गाय को कुर्बानी के लिए बेचने की फिराक में थे, लेकिन वहां मौजूद हिंदुओं ने इन्हें पकड़ लिया.
एक एक्स यूजर ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “बंगाल में कुर्बानी के लिए गाय बेचने आये दो कसाइयों को गौ पुत्रों ने रंगे हाथों पकड़ लिया...दोनों के पास न तो गाय का मालिक होने का. कोई प्रमाण था न ही खुद के भारतीय होने का…हिन्दुओं ने दोनों को पुलिस को सुपुर्द किया.”
आज तक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो जुलाई 2025 का है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी.
कैसे पता की सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने से ये हमें वेस्ट बर्दवान के तृणमूल कांग्रेस के नेता नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के 1 अगस्त, 2025 के एक फेसबुक पोस्ट में मिला. इस पोस्ट में वायरल क्लिप से मिलती-जुलती तस्वीरें हैं. जाहिर है, ये घटना बंगाल में बीजेपी सरकार बनने से पहले की है.
पोस्ट में लिखा है कि, बीजेपी नेता परिजात गांगुली ने 31 जुलाई, 2025 को दुर्गापुर के कुछ स्थानीय लोगों को परेशान किया था. चक्रवर्ती ने पोस्ट में गांगुली की गिरफ्तारी की मांग की थी.
इस घटना के बारे में और जानकारी पाने के लिए हमने कीवर्ड सर्च किया. ऐसा करने से अगस्त 2025 में द हिंदू और इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट्स मिलीं. इन खबरों के मुताबिक, गौरक्षक समूह के नेता परिजात गांगुली ने कुछ मुस्लिम लोगों को बांधकर उनके साथ मारपीट की थी और उन्हें कान पकड़कर उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया था. टीएमसी नेता नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने इस बारे में कोक ओवन पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी.
1 अगस्त, 2025 को पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक एक्स पोस्ट के जरिये बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय के दो लोग, जो खेती के लिए मवेशी ले जा रहे थे, उन्हें दुर्गापुर में एक राजनीतिक दल से जुड़े कुछ लोगों ने रोककर बुरी तरह पीटा. पोस्ट में ये भी लिखा है कि घटना के संबंध में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली थी और दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था.
टेलीग्राफ की 12 अगस्त, 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी परिजात गांगुली को झारखंड के धनबाद में गिरफ्तार किया गया था.
इस कानून की बारीकियों को समझने के लिए आजतक ने कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील शमीम अहमद से बात की. अहमद ने हमें बताया, “यह अधिसूचना कोई नया कानून नहीं है. नई सरकार ने बस पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 को सख्ती से लागू किया है.”
उन्होंने ये भी बताया कि कानूनी तौर पर, पशुओं का वध करने पर रोक नहीं है, लेकिन इसके लिए नगर निगम और सरकारी पशु चिकित्सक से प्रमाण पत्र लेना जरूरी है.
अहमद का कहना है कि इस प्रशासनिक प्रक्रिया से ईद के दौरान कुर्बानी के लिए पशुओं की उपलब्धता में काफी कमी आ सकती है. इसका प्रभाव केवल मुस्लिम समुदाय तक ही सीमित नहीं रहेगा, पशु व्यापारियों और मालिकों का एक बड़ा वर्ग, जिनमें से कई हिंदू हैं और आजीविका के लिए पशुओं की बिक्री पर निर्भर हैं. ऐसे लोगों को भी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
फैक्ट चेक ब्यूरो