पढ़ाई और प्रॉपर्टी में औसत ब्रिटिश से कहीं आगे, फिर ब्रिटेन में सिखों का रुतबा कनाडा जैसा क्यों नहीं?

लंदन में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग ने एक नाबालिग सिख लड़की का यौन शोषण किया. घटना का पता लगते ही सिख समुदाय भड़क उठा. अब लंदन की सड़कों पर उनका प्रोटेस्ट जारी है. लंदन समेत पूरे ब्रिटेन में सिखों की अच्छी-खासी आबादी है. सामाजिक-आर्थिक तौर पर भी यह समुदाय औसत ब्रिटिश नागरिकों से बेहतर स्थिति में है. फिर कनाडा की बजाए ये देश उतना लोकप्रिय क्यों नहीं?

Advertisement
ब्रिटिश पार्लियामेंट में सिखों की मौजूदगी कनाडाई संसद की तुलना में सीमित रही. (Photo- Pexels) ब्रिटिश पार्लियामेंट में सिखों की मौजूदगी कनाडाई संसद की तुलना में सीमित रही. (Photo- Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

नाबालिग बच्चियों को बहलाकर उनका यौन शोषण करने वाला ग्रूमिंग गैंग ब्रिटेन में फिर एक्टिव दिख रहा है. इस बार टारगेट ब्रिटिश नहीं, बल्कि एक सिख बच्ची थी. घटना का पता लगते ही सिख समुदाय सड़कों पर आ गया और विरोध प्रदर्शन करने लगा. पाकिस्तानियों की तुलना में सिख समुदाय बेहद मजबूत स्थिति में है. वो पढ़ा-लिखा भी है, और ज्यादा कमाऊ भी. यहां तक कि घर के स्वामित्व के मामले में भी सिख आगे हैं. लेकिन राजनीतिक पकड़ कनाडा जितनी मजबूत नहीं.  

Advertisement

सबसे पहले जानते चलें कि हालिया घटना क्या है.

वेस्ट लंदन के हॉनस्लो इलाके में सिख आबादी काफी ज्यादा है. यहीं रहने वाली 16 साल की पंजाबी लड़की को बहलाकर एक ग्रूमिंग गैंग ने उसका यौन शोषण किया. लड़की ने भागने की भी कोशिश की, लेकिन उसे धमकाकर चुप करा दिया गया. घटना का पता लगते ही सिखों ने उसे कब्जे से छुड़ाया. फिलहाल एक आरोपी हिरासत में है और मामले की जांच जारी है.

ग्रूमिंग गैंग ऐसे लोगों का गुट होता है जो नाबालिग बच्चों को धीरे-धीरे जाल में फंसाता है. ग्रूमिंग का मतलब है पहले भरोसा जीतना और फिर शोषण करना. इसका एक टिपिकल सिस्टम है. ये लोग पहले दोस्ती करते हैं, मदद का दिखावा करते हैं और फिर तोहफे देते हुए इमोशनली ट्रैप कर लेते हैं. इसके बाद शुरू होता है यौन शोषण का सिलसिला. ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की शिकायतें और मामले दो दशक से भी ज्यादा समय से सुनाई दे रही हैं. हालांकि इनपर रोक के लिए खास एक्शन नहीं हो सका.

Advertisement
लंदन के कई हिस्से पंजाबी मेजोरिटी के चलते मिनी पंजाब कहलाते हैं. (Photo- Getty Images)

पहले ब्रिटिश या विदेशी बच्चियां ही निशाने पर होती थीं, लेकिन सिख समुदाय की लड़कियां भी अब ग्रूमिंग गैंग से बची नहीं. घटना के बाद लंदन के पंजाबियों में काफी गुस्सा दिख रहा है. प्रोटेस्ट हो रहे हैं. इसमें प्रभावित इलाका हॉनस्लो ही नहीं, बल्कि पंजाबी बहुल तमाम क्षेत्र शामिल हैं. 

ब्रिटेन में कितने पंजाबी और किस स्थिति में

देश में पंजाबी भाषा बोलने वाले लोगों की आबादी सात लाख से ऊपर है, वहीं लंदन में ही करीब तीन लाख लोग रहते हैं. ब्रिटेन में सबसे बड़ी सिख आबादी यहीं पर है. ज्यादातर लोग वेस्ट लंदन के साउथहॉल में बसे हुए हैं. यहां के गली-कूचों में पंजाबी महक और भाषा मिल जाएगी. इस इलाके को मिनी पंजाब भी कहा जाता है. इसके अलावा हॉनस्लो, जहां ये घटना हुई थी,  वहां और ईलिंग में भी पंजाबी बसे हुए हैं. 

ब्रिटेन में पंजाबी खासकर सिख समुदाय औसत ब्रिटिश आबादी की तुलना में ज्यादा पढ़ा-लिखा और आर्थिक रूप से मजबूत माना जाता रहा. सेंसस और सामाजिक अध्ययनों के अनुसार सिख समुदाय में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले लोग ब्रिटिश औसत से ज्यादा हैं. खासकर 18 से 40 साल की उम्र में यूनिवर्सिटी एजुकेशन तेजी से बढ़ी है. दूसरी और तीसरी पीढ़ी के सिखों में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, फार्मासिस्ट, अकाउंटेंट और आईटी प्रोफेशनल बड़ी संख्या में हैं. पेरेंट्स के अलावा गुरुद्वारे भी पढ़ाई में सहयोग करते हैं ताकि घरवालों पर आर्थिक दबाव कम पड़े. 

Advertisement
 कनाडा में पंजाबी समुदाय के लोगों के पास राजनीतिक ताकत काफी है. (Photo- Getty Images)

मकान की ओनरशिप भी काफी

दिलचस्प है कि सिख समुदाय में हाउस ओनरशिप भी औसत ब्रिटिश आबादी से ज्यादा दिखने लगी. जहां औसत ब्रिटिश आबादी में घर के मालिक होने की दर करीब 65 फीसदी के आसपास रही, वहीं सिखों में यह आंकड़ा इससे ऊपर लगभग 70 फीसदी रहा. सिख समुदाय लंबे समय से ट्रांसपोर्ट, रिटेल और होटल बिजनेस में रहा. इन सेक्टरों से नियमित और लंबी आमदनी बनी रहती है, जिससे कर्ज लेना और चुकाना आसान होता है. यहां जॉइंट फैमिली भी होती है, जिसमें सभी सदस्य मिलकर कर्ज चुकाते हैं. 

फिर कनाडा जितनी मजबूत क्यों नहीं आवाज

बेहतर सामाजिक-आर्थिक स्थित के बाद भी ब्रिटेन की लोकप्रियता कनाडा की तुलना में कम रही. इमिग्रेशन पॉलिसी इसकी बड़ी वजह है. कनाडा ने लंबे समय तक पॉइंट बेस्ड सिस्टम अपनाया, जिससे पढ़े-लिखे और स्किल्ड सिखों को स्थायी नागरिकता आसानी से मिल सकी. वहीं ब्रिटेन में इमिग्रेशन नियम सख्त रहे. नागरिकता की प्रक्रिया भी मुश्किल और लंबी रही. इससे ब्रिटेन पहली पसंद नहीं बन सका. 

दूसरी वजह राजनीतिक प्रतिनिधित्व है. कनाडा में पंजाब मूल के लोग ब्रिटेन में बसे पंजाबियों से लगभग एक लाख ही ज्यादा हैं. कुल आबादी में भी एक प्रतिशत ही कम-ज्यादा है. इसके बाद भी कनाडा में पंजाबियों को वोट बैंक के लिहाज से अहम माना जाता रहा. वहां कई सिख लीडर काफी ऊंचे पदों पर पहुंचे. ब्रिटेन में सिख सांसद और काउंसलर जरूर हैं, लेकिन टॉप लेवल पर उनकी मौजूदगी सीमित रही. 

Advertisement

रेसिज्म भी एक समस्या है. ब्रिटेन में लगभग तीन दशक पहले तक पंजाबियों को भेदभाव झेलना पड़ता था. ये फर्क नौकरियों से लेकर सड़कों तक दिखता था. उनके धार्मिक प्रतीकों को लेकर भी स्वीकार्यता नहीं थी. दूसरी तरफ, कनाडा ने मल्टीकल्चरिज्म को सरकारी नीति के तौर पर अपना लिया, जिससे पंजाबी मूल के लोग वहां ज्यादा सहज रहने लगे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement