दादा साहब के जीवन में नया मोड़ तब आया जब उन्होंने क्रिसमस के दौरान 1910 में मुंबई के एक थिएटर में एक फिल्म देखी. यह फिल्म जीसस क्राइस्ट के जीवन पर बनी थी. फिल्म का नाम था 'द लाईफ ऑफ क्राइस्ट'. यही वह समय था जब दादा साहब फाल्के के मन में फिल्में बनाने के ख्याल ने दस्तक दी. उन्हें क्राइस्ट की जगह कृष्ण और राम नजर आने लगे. यहीं से शुरु हुआ उनके फिल्म बनाने का सफर.