ताजमहल विध्वंस, काली बारिश…डराता है Netflix की ‘लैला’ का भविष्य!

सीरीज में जो भविष्य दिखाया गया है वो थोड़ा डराता है. और इसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक तगड़ी बहस भी छिड़ी है. क्योंकि कुछ ऐसा होगा, जो हर किसी को हैरान कर सकता है.

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सीरीज के एक सीन में हुमा कुरैशी (Netflix) सीरीज के एक सीन में हुमा कुरैशी (Netflix)

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2019,
  • अपडेटेड 10:41 AM IST

भविष्य में क्या होगा? भविष्य कैसा दिखेगा? ये सवाल हर किसी के मन में उठते हैं. अभी तक की बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों में भविष्य को लेकर हमेशा टेक्नोलॉजी, उड़ती हुई गाड़ियां ही दिखाई गई हैं. लेकिन Netflix पर नई सीरीज़ लैला में इस अंदाज को थोड़ा बदला गया है. हुमा कुरैशी की इस सीरीज़ में 2047 का वक्त दिखाया गया है, जो बताता है कि अभी और तब में ज्यादा अंतर नहीं रहने वाला है. हालांकि सीरीज में जो भविष्य दिखाया गया है वो थोड़ा डराता है. और इसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक तगड़ी बहस भी छिड़ी है. क्योंकि कुछ ऐसा होगा, जो हर किसी को हैरान कर सकता है. 6 एपिसोड की लैला सीरीज़ में दिखाए दिए कुछ ऐसे ही बड़े प्वाइंट्स पढ़ें...

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मचेगी पानी की मार!

2047 की इस कहानी में शुरुआत ही पानी से होती है. पानी को लेकर कई हिस्सों में भीड़ है, लोग एक दूसरे से लड़ रहे हैं. नाले का पानी पी रहे हैं, एटीएम की तरह पानी की जगह हैं जिसे खरीदकर ही काम चल रहा है. तो वहीं हुमा कुरैशी का कैरेक्टर शालिनी भी पानी को गैरकानूनी तरीके से अपने घर में लाता है और स्वीमिंग पूल बनाता है, जो कि उनके परिवार के मौत का कारण बनता है. इतना ही नहीं काली बारिश का होना, काले पानी को ही पीना भी सभी को चौंका सकता है.

ताज महल विध्वंस!

1992 में हुए बाबरी विध्वंस ने अभी तक भारत की राजनीति में जगह बनाई हुई है. लेकिन मोहब्बत की निशानी माने जाने वाले ताजमहल को क्या कोई गिरा सकता है. लैला में ऐसा ही दिखाया गया है, जब हिंदू राष्ट्र आर्यवर्त की स्थापना होती है तो जोशी जी (किरदार का नाम) के समर्थक ताजमहल को गिरा देते हैं. सीरीज़ के एक सीन में ताज महल गिराते हुए भी दिखाया गया है.

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आर्यवर्त की स्थापना!

अभी तक की फिल्मों में भविष्य को अलग ही तरीके से दिखाया गया है, हर किसी के पास घर है, पैसा है लेकिन ये सीरीज़ कुछ नया लाई है. तब तक देश आर्यवर्त बन चुका है और एक नियम के तहत ही चल रहा है. हर कोई एक दूसरे को जय आर्यवर्त कहकर संबोधित कर रहा है. एक समुदाय को पीड़ित किया जा रहा है. हुमा कुरैशी के किरदार की शादी भी एक विशेष समुदाय से होती है, इसलिए उन्हें सीरीज में शुद्धि दिलाई जाती है.

शुद्धिकरण की प्रक्रिया!

सीरीज में एक जगह दिखाई गई है श्रम केंद्र. ये आर्यवर्त की ही जगह है, जहां पर महिलाओं को जबरन लाया जाता है. जहां उनसे काम कराया जाता है और पश्याताप भी कराया जाता है, मसलन जिन हिंदू महिलाओं ने धर्म से उलट कोई काम किया है, मुस्लिम युवक से शादी की है. या महिला होने की मर्यादा को लांघा है. इस जगह झूठन खिलाया जाता है, मजदूरी करवाई जाती है और फैक्ट्रियों में काम पर भेजा जाता है.

अभी तक की भविष्य वाली फिल्मों में हमें ऐसा नहीं देखने को मिलता है, क्योंकि 21वीं सदी में महिलाओं की बराबरी की बात होती है. जो आगे जाकर और भी विस्तार होने जैसा लगता है लेकिन सीरीज़ का नजरिया एक अलग ही फैक्टर दिखाता है.

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इमारतों से ऊंचा होता कूड़े का ढेर!

क्लाइमेट चेंज का ज्ञान इस समय दुनियाभर में देखने-सुनने को मिलता है. लेकिन, स्वच्छता का ये अभियान 2047 में दिख नहीं रहा है. सीरीज़ में कई ऐसे सीन हैं जो कूड़े के पहाड़ से ढके हुए हैं और इमारतों से ऊंची कूड़े की ऊंचाई है. जो आपके भविष्य को डरावना बता रही है.

अगर बात पूरी सीरीज़ की करें तो इसमें कुल 6 एपिसोड हैं, एक एपिसोड की लंबाई करीब 40 से 50 मिनट हैं. पूरी कहानी हुमा कुरैशी और उनकी बेटी के आसपास ही घूमती है. उनके अलावा साउथ सुपरस्टार सिद्धार्थ ने भी सीरीज़ में शानदार रोल किया है. हालांकि, कुछ जगह पर सीरीज़ आपको बोर भी करती नज़र आएगी. लेकिन नेटफ्लिक्स ने हर बार की तरह कुछ अलग करने की ही कोशिश की है.

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